एलिस पैरी ने रचा इतिहास, रिकॉर्ड सातवीं बार टी20 वर्ल्ड कप फाइनल खेल दिग्गज एलिसा हीली की बराबरी की

London News: लगातार दो आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल से चूकने के बाद पूर्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर खिताबी मुकाबले में कदम रखा है। इंग्लैंड में चल रहे आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप दो हजार छब्बीस के फाइनल में सोफी मॉलिन्यू की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जगह बनाई। रविवार पांच जुलाई को दोनों टीमें ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खिताबी मुकाबला खेलने उतरीं।

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चोट के संशय को पीछे छोड़ एलिस पैरी ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

इस मुकाबले की प्लेइंग-इलेवन पर मुहर लगते ही ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज ऑलराउंडर एलिस पैरी ने एक विशेष उपलब्धि अपने नाम कर ली। वह रिकॉर्ड सातवीं बार टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल खेलने मैदान पर उतरीं। हालांकि इस अहम मुकाबले से पहले पैरी के खेलने पर काफी संशय बना हुआ था।

वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल मैच के दौरान पैरी की हैमस्ट्रिंग में गंभीर परेशानी उठ गई थी। इसके चलते फैंस को लग रहा था कि शायद वह इस बड़े मैच से बाहर हो सकती हैं। मगर टॉस के समय कप्तान मॉलिन्यू ने टीम में किसी बदलाव न होने की घोषणा कर सबको राहत दी।

पैरी ने की एलिसा हीली के सबसे बड़े वर्ल्ड कप रिकॉर्ड की बराबरी

साल दो हजार नौ के पहले टी20 वर्ल्ड कप से खेल रहीं पैरी ने अब तक सभी दस सीजन में हिस्सा लिया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने रिकॉर्ड आठवीं बार फाइनल का सफर तय किया, जिसमें पैरी का यह सातवां खिताबी मुकाबला था। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पूर्व साथी खिलाड़ी एलिसा हीली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

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इन दोनों महान खिलाड़ियों के नाम अब सबसे ज्यादा सात-सात बार वर्ल्ड कप फाइनल खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। पैरी केवल साल दो हजार बीस के फाइनल मुकाबले में चोट के कारण नहीं खेल पाई थीं। इस मौजूदा टूर्नामेंट में भी पैरी का प्रदर्शन बेहद शानदार और प्रभावशाली रहा है।

मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में बल्ले और गेंद से दिखाया दमदार प्रदर्शन

इस टूर्नामेंट के फाइनल से पहले छह पारियों में पैरी ने छियालीस की बेहतरीन औसत से एक सौ पचासी रन बनाए। यह इस सीजन में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं। इसके अलावा उन्होंने तीन मैचों में कसी हुई गेंदबाजी करते हुए चार महत्वपूर्ण विकेट भी चटकाए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने पिछले नौ सीजन में एक भी अर्धशतक नहीं लगाया था। मगर इस बार उन्होंने लगातार दो पारियों में पचास का आंकड़ा पार किया। इसमें भारत के खिलाफ खेली गई छप्पन रनों की मैच जिताऊ पारी सबसे यादगार और खास रही।

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