Delhi News: भारतीय परंपराओं और हिंदू धर्म में हर मांगलिक कार्य के पीछे कोई न कोई गहरा रहस्य छिपा होता है। शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो, शगुन देने की प्रथा हर घर में निभाई जाती है। इसमें हमेशा एक रुपया अतिरिक्त जोड़ा जाता है।
आपने अक्सर देखा होगा कि लोग किसी को उपहार देते समय 100, 500 या 1000 रुपये के बजाय हमेशा 101, 501 या 1100 रुपये का लिफाफा देते हैं। इस एक अतिरिक्त रुपये को जोड़ने के पीछे केवल सामाजिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बेहद गहरे आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
शुभकामनाओं और नए रिश्ते की शुरुआत
हमारी गौरवशाली संस्कृति में शगुन को बेहद शुभ संकेत माना जाता है। किसी प्रियजन को शगुन देना केवल कोई भौतिक उपहार या धन देने तक सीमित नहीं होता है। बल्कि यह सामने वाले व्यक्ति के सुखी, सफल और अत्यंत समृद्ध जीवन की मंगल कामना का एक पवित्र प्रतीक है।
प्राचीन समय में जब दो अलग परिवार किसी नए रिश्ते की शुरुआत करते थे, तब शगुन देना उस रिश्ते की सहर्ष स्वीकृति माना जाता था। आज के इस आधुनिक दौर में भी सगाई, रोका और विवाह जैसे तमाम बड़े मांगलिक अवसरों पर यह खूबसूरत परंपरा पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है।
क्यों वर्जित मानी जाती हैं शून्य पर खत्म होने वाली संख्याएं
लोक मान्यताओं और प्राचीन ज्योतिष के अनुसार, नंबर 1 को नई शुरुआत, गतिशीलता और निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। जब कोई व्यक्ति 100 के बजाय 101 रुपये देता है, तो इसका सीधा अर्थ यह होता है कि उसकी दी गई शुभकामनाएं कभी समाप्त नहीं होंगी बल्कि आगे बढ़ती रहेंगी।
वास्तु और अंक ज्योतिष के अनुसार 100 या 500 जैसी संख्याएं पूर्णता को दर्शाती हैं, जिसका मतलब ठहराव भी हो सकता है। इसमें जोड़ा गया एक रुपया जीवन में आगे बढ़ने, निरंतर विकास करने और प्रगति का संकेत देता है। इसलिए शगुन में एक रुपया जोड़ना अति शुभ होता है।
धन की देवी माता लक्ष्मी से है सीधा संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिक्कों को हमेशा से ही समृद्धि, सौभाग्य और बरकत का प्रतीक माना गया है। चूंकि सिक्के धातु से निर्मित होते हैं, इसलिए इन्हें स्थिरता और धन की देवी मां लक्ष्मी से सीधे तौर पर जोड़कर देखा जाता है। यह घर में वैभव लाता है।
यही मुख्य कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी लोग नोटों के साथ एक धातु का सिक्का रखना कभी नहीं भूलते हैं। शगुन का वास्तविक महत्व केवल पैसों की बड़ी राशि में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी सच्ची भावना, प्रेम, आदर और अपनापन व्यक्त करने में होता है।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


