Spiritual News: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। कल ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह चमत्कारी व्रत तीन साल में सिर्फ एक बार आता है। भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत बहुत लाभकारी होता है। सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत को करने से घर में सुख और भारी समृद्धि आती है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
परमा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत ग्यारह जून को होगी। यह गुरुवार सुबह बारह बजकर सत्तावन मिनट पर शुरू होगी। वहीं एकादशी तिथि का समापन उसी रात दस बजकर छत्तीस मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के कारण ग्यारह जून को ही यह पवित्र व्रत रखा जाएगा।
व्रत पारण का सही समय और नियम
धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को शुभ माना गया है। नियम से व्रत खोलने पर ही पूर्ण फल मिलता है। परमा एकादशी का पारण बारह जून शुक्रवार को होगा। पारण का सही समय सुबह पांच बजकर तेईस मिनट से आठ बजकर दस मिनट तक रहेगा।
परमा एकादशी की सरल और सही पूजा विधि
इस खास दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लेना बहुत जरूरी है। घर के पूजा स्थल पर एक साफ चौकी बिछाएं। उस चौकी पर भगवान श्रीहरि विष्णु की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर को आदरपूर्वक स्थापित करें।
अब भगवान विष्णु को पीले चंदन और हल्दी का तिलक श्रद्धा से लगाएं। उन्हें ताजे फल, सुगंधित फूल, मेवे, धूप और दीप अर्पित करें। प्रसाद के रूप में भगवान को तुलसी दल और केला जरूर चढ़ाएं। इसके बाद शांति से बैठकर परमा एकादशी की पावन व्रत कथा का पाठ करें।
कथा पढ़ने के बाद भगवान विष्णु के सिद्ध मंत्रों का सच्चे मन से जाप करें। मंत्र जाप के अंत में भगवान की आरती पूरे भक्ति भाव से उतारें। पूजा पूरी होने के बाद परिवार और भक्तों में प्रसाद जरूर बांटें। इस विधि से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Pandit Balkrishan Sharma


