Varanasi News: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 11 जून को परम एकादशी का बेहद शुभ व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी साधक इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करता है, उसे जीवन के सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम जी के अभिषेक का विशेष विधान है।
शास्त्रों में माना गया है कि परम एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम की विशेष साधना करने से कुंडली के कई गंभीर दोष शांत हो जाते हैं। इससे घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास हमेशा बना रहता है। अगर आप भी इस एकादशी पर शालिग्राम जी का दिव्य अभिषेक करना चाहते हैं, तो इसकी सरल और सटीक विधि जानना बेहद जरूरी है।
अभिषेक के लिए पहले से जुटा लें यह जरूरी सामग्री
शालिग्राम जी के दिव्य अभिषेक को शुरू करने से पहले कुछ जरूरी सामग्रियां एकत्रित कर लें। इसके लिए आपको गाय का कच्चा दूध, शुद्ध शहद, शक्कर, गाय का देसी घी, ताजा दही और पवित्र गंगाजल की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही पूजा के लिए साफ जल, गोपी चंदन, तुलसी दल, ताजे फूलों की माला और फल-मिठाई भी पास रख लें।
पूजा शुरू करने के लिए पीतल या तांबे की एक साफ थाली, देसी घी का दीपक और धूपबत्ती भी अपने पास रख लें। एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर सच्चे मन से एकादशी व्रत और भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
इसके बाद अपने घर के मंदिर को साफ करें और पूरे स्थान पर गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें। अब एक साफ पात्र में कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को एक साथ मिलाकर पंचामृत तैयार कर लें। ध्यान रखें कि इस पंचामृत में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
जानिए पंचामृत अभिषेक की पूरी और सटीक विधि
पूजा स्थान पर तांबे या पीतल की थाली रखें और उसमें भगवान शालिग्राम को श्रद्धापूर्वक विराजमान करें। सबसे पहले शालिग्राम जी पर शुद्ध जल की धारा अर्पित करें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र का निरंतर और शांत मन से जप करते रहें।
इसके बाद तैयार किए गए पंचामृत से भगवान शालिग्राम का दिव्य अभिषेक करें। पंचामृत चढ़ाने के बाद दोबारा साफ जल या गंगाजल से उन्हें अच्छी तरह स्नान कराएं। स्नान के बाद भगवान को एक साफ कपड़े से पोंछकर उन्हें सुंदर पीले वस्त्र अर्पित करें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
अब शालिग्राम जी को गोपी चंदन का तिलक लगाएं और उन्हें ताजे फूलों की माला पहनाएं। उनके समक्ष देसी घी का दीपक और धूप जलाकर पूरे भाव से आरती करें। इसके बाद भगवान को मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में सभी लोगों में प्रसाद बांटें और खुद भी इसे ग्रहण करें।
परम एकादशी पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां
भगवान शालिग्राम की पूजा करते समय कुछ विशेष सावधानियां रखना बेहद जरूरी होता है। शालिग्राम जी की पूजा में कभी भी अक्षत यानी चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही पूजा के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति कड़वाहट या गुस्सा न लाएं।
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर हो जाएगी। वहीं, इस बेहद फलदायी तिथि का समापन 11 जून को ही रात 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। इसलिए उदय तिथि के अनुसार 11 जून को ही यह महाव्रत रखा जाएगा।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


