Delhi News: इस्लामिक कैलेंडर यानी हिजरी संवत के अनुसार मुहर्रम कोई त्योहार नहीं, बल्कि शोक और इबादत का पाक महीना है। इस पवित्र महीने से ही इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है। वर्ष 2026 में भारत में मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण 10वां दिन यानी यौमे आशूरा 26 जून, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
कर्बला की जंग में इमाम हुसैन की शहादत का इतिहास
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार मुहर्रम के महीने का सीधा संबंध इराक के कर्बला में हुई ऐतिहासिक जंग से है। इस भीषण युद्ध में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए लड़ते हुए अपने 72 साथियों के साथ शहादत का जाम पिया था।
खुशी के हर काम पर क्यों लगी होती है पाबंदी?
शोक का महीना होने के कारण मुहर्रम के दौरान किसी भी तरह का जश्न मनाना पूरी तरह मना होता है। इस पूरे महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग शादी-ब्याह, नया घर खरीदना या कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। यह पावन महीना इंसान को त्याग, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देता है।
काले कपड़े पहनने और ताजिया निकालने की खास परंपरा
मुहर्रम के दौरान दुनिया भर के मुसलमान, विशेषकर शिया समुदाय के लोग काले रंग के कपड़े पहनकर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। मान्यता है कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिजनों ने भी गम मनाते हुए काले वस्त्र धारण किए थे। इस दौरान मजलिसों का आयोजन होता है और ताजिए निकाले जाते हैं।
आशूरा के दिन विशेष इबादत और रोजा रखने का महत्व
मुहर्रम के 10वें दिन को यौमे आशूरा कहा जाता है, जो इस बार 26 जून को है। इस दिन इमाम हुसैन की महान कुर्बानी को याद करते हुए विशेष इबादत की जाती है। बहुत से मुसलमान इस दिन अल्लाह की रजा के लिए रोजा भी रखते हैं और गरीबों में शरबत व भोजन बांटते हैं।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


