एप्पल के मालिक से लेकर पीएम तक शीश झुकाते हैं, जानिए आखिर क्यों पड़ा इसका नाम ‘कैंची धाम’

Nainital News: उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों में स्थित कैंची धाम आश्रम में आज 15 जून को स्थापना दिवस बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। बाबा नीम करौली के इस पावन दर पर आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है।

नीम करौली बाबा को 20वीं सदी के सबसे चमत्कारी और महान संतों में गिना जाता है। बाबा के भक्त उन्हें संकटमोचन भगवान हनुमान का साक्षात अवतार मानते हैं। आज भी पूरी दुनिया में लाखों लोग बाबा की पवित्र शिक्षाओं और उनके दिव्य जीवन दर्शन से प्रेरणा लेते हैं।

क्यों पड़ा इस पावन जगह का नाम ‘कैंची धाम’

नीम करौली बाबा पहली बार साल 1961 में इस पहाड़ी इलाके में पहुंचे थे। इसके बाद 15 जून 1964 को इस पावन आश्रम की विधिवत स्थापना की गई थी। तभी से हर साल 15 जून को यहां विशाल स्थापना दिवस मेला और भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है।

बाबा नीम करौली ने 10 सितंबर 1973 को महासमाधि ली थी। इसके बाद उनके अस्थि कलश को इसी धाम में स्थापित किया गया। इस आश्रम की तरफ जाने वाली सड़क पर दो बेहद तीखे मोड़ हैं, जो बिल्कुल कैंची की तरह दिखते हैं। इसी वजह से इसका नाम कैंची धाम पड़ा।

घने जंगल के बीच हुई मंदिर की स्थापना

हनुमान जी के परम भक्त नीम करौली बाबा ने अपने जीवनकाल में 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया था। साल 1962 में भवाली की तरफ आते समय बाबा ने इस स्थान को देखा था। उस समय यहां बेहद घना जंगल हुआ करता था और एक पुरानी गुफा थी।

सिद्धियों के ज्ञाता बाबा नीम करौली ने इस बियाबान जंगल में ही बजरंगबली के मंदिर के लिए जगह चिन्हित कर दी थी। इसके बाद यहां सफाई करवाकर सबसे पहले हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई। धीरे-धीरे यह स्थान पूरी दुनिया में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया।

Author: Harish Rawat

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