हिंदू पौराणिक कथाओं के 5 सबसे शक्तिशाली धनुष, जिनकी अद्भुत ताकत से बड़े-बड़े योद्धा भी कांपते थे

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New Delhi News: हिंदू धर्म ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में देवी-देवताओं के दिव्यास्त्रों का विशेष महत्व है। इनमें धनुष को सबसे पावरफुल और श्रेष्ठ वेपन माना गया है। भगवान विश्वकर्मा द्वारा डिजाइन किए गए ये पांच प्राचीन धनुष पल भर में पूरी दुनिया को तबाह करने की क्षमता रखते थे। इन वेपंस से बड़े-बड़े योद्धा भी डरते थे।

भगवान शिव का पावरफुल और विनाशकारी धनुष पिनाक

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम भगवान शिव के पिनाक धनुष का आता है। वाल्मीकि रामायण में इस महान और हैवी वेपन का डिटेल में जिक्र मिलता है। महादेव ने इसी शक्तिशाली धनुष की मदद से त्रिपुरासुर नामक खतरनाक राक्षस के तीनों नगरों को सिर्फ एक ही तीर से पूरी तरह नष्ट कर दिया था।

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श्री राम का अचूक धनुष कोदंड और उसकी शक्ति

लिस्ट में दूसरा सबसे पावरफुल वेपन कोदंड है, जो भगवान श्री राम का पर्सनल धनुष था। रामायण के अनुसार, इस धनुष की टंकार इतनी डरावनी थी कि राक्षसों के हौसले टूट जाते थे। लंका युद्ध में श्री राम ने इसी से रावण की सेना का अंत किया था। इसका बाण कभी अपना टारगेट मिस नहीं करता था।

श्री कृष्ण द्वारा महाभारत में इस्तेमाल हुआ शार्ंग धनुष

तीसरे नंबर पर भगवान विष्णु का मेन धनुष शार्ंग शामिल है, जिसे महाभारत और विष्णु पुराण में मेंशन किया गया है। विश्वकर्मा जी द्वारा निर्मित यह धनुष बहुत हैवी और मैजिकल था। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इसी स्पेशल वेपन का यूज करके कई खतरनाक राक्षसों का वध किया था, जो आसुरी शक्तियों को भस्म कर देता था।

अर्जुन का मशहूर गांडीव और उसका अद्भुत इतिहास

चौथे स्थान पर गांडीव धनुष का नाम आता है। यह महाभारत के टॉप फाइटर अर्जुन का मेन हथियार था। आदि पर्व के अनुसार, वरुण देव ने अग्निदेव की रिक्वेस्ट पर इसे अर्जुन को गिफ्ट किया था। यह इतना पावरफुल था कि इसकी आवाज से धरती कांपती थी। अर्जुन ने इसी के दम पर कौरवों की बड़ी आर्मी को हराया था।

सूर्यपुत्र कर्ण के अजेय धनुष विजय की खास ताकत

पांचवां सबसे पावरफुल वेपन विजय धनुष है, जो सूर्यपुत्र कर्ण के पास मौजूद था। महाभारत के अनुसार, यह ओरिजिनल रूप से देवराज इंद्र का था। बाद में भगवान परशुराम ने इसे अपने फेवरेट स्टूडेंट कर्ण को दे दिया था। इस वेपन की सबसे बड़ी क्वालिटी यह थी कि इसे होल्ड करने वाले व्यक्ति को कोई भी हरा नहीं सकता था।

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