बीएसएनएल अधिकारी शेर सिंह को कैट से बड़ी राहत, ट्रांसफर और रिलीविंग ऑर्डर पर लगी रोक

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Chandigarh News: भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के एसडीओ शेर सिंह को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच से बड़ी राहत मिली है। ट्रिब्यूनल ने अधिकारी के ट्रांसफर और उन्हें रिलीव करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शेर सिंह को करनाल से हिसार भेजा जा रहा था।

विभाग ने शेर सिंह के ट्रांसफर ऑर्डर करीब दो साल पहले ही जारी कर दिए थे। हालांकि, उन्हें पद से रिलीव करने के आदेश अभी हाल ही में 30 मार्च 2026 को जारी किए गए थे। इस अचानक जारी हुए रिलीविंग ऑर्डर को शेर सिंह ने कैट में चुनौती दी थी।

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पत्नी की नौकरी और बच्चे की पढ़ाई का दिया हवाला

याचिकाकर्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उनकी पत्नी हरियाणा सरकार की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की सक्रिय सदस्य हैं और फिलहाल करनाल में ही अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके साथ ही उनके बेटे का 12वीं कक्षा का नया शैक्षणिक सत्र भी अभी शुरू हुआ है।

एसडीओ ने दलील दी कि इस समय नए स्टेशन पर ट्रांसफर होने से उनके बेटे की बोर्ड परीक्षा की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसके अलावा करनाल में कार्यरत उनकी पत्नी की नौकरी पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। इस मानवीय आधार पर उन्होंने रोक लगाने की मांग की थी।

बीएसएनएल की दलीलें खारिज, कैट ने दिए राहत के आदेश

दूसरी ओर, बीएसएनएल प्रबंधन ने कैट के सामने दलील दी कि शेर सिंह कई वर्षों से एक ही स्टेशन पर तैनात हैं। विभाग ने वर्ष 2024 में ही उनके ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए थे, इसके बावजूद वह अब तक अपने पद से कार्यमुक्त नहीं हुए थे।

कैट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारी के हक में फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा और पत्नी की सरकारी सेवा जैसे संवेदनशील पहलुओं पर विचार करना बेहद जरूरी है। विभाग को इन परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए था।

ट्रिब्यूनल ने बीएसएनएल की ट्रांसफर पॉलिसी के पैरा 6.6 का हवाला दिया, जिसके तहत 10वीं या 12वीं के बच्चों की पढ़ाई के लिए एक वर्ष तक राहत मिल सकती है। इसके अलावा पॉलिसी का पैरा 6(जी) भी पति-पत्नी को एक ही स्टेशन पर तैनात करने का प्रावधान देता है।

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