वैदिक पंचांग 28 जून 2026: रविवार को बन रहा है बेहद शुभ अमृत काल और अभिजित मुहूर्त, जानिए राहुकाल का समय और दिशाशूल

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New Delhi: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या बड़े इन्वेस्टमेंट से पहले पंचांग देखने की प्राचीन परंपरा है। वैदिक पंचांग मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित होता है। 28 जून 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो रात 03:06 बजे तक रहेगी।

पितृ कार्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तम है चतुर्दशी तिथि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चतुर्दशी तिथि को पितृ कार्य और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस तिथि के समाप्त होने के बाद पूर्णिमा शुरू हो जाएगी। इस दिन सुबह 04:11 बजे से 04:59 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। वहीं, शाम को 05:34 बजे से लेकर 07:10 बजे तक अमृत काल का शुभ समय रहेगा।

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सूर्य और चंद्रमा का गोचर बदल रहा है नक्षत्रों की चाल

इस रविवार को सूर्योदय सुबह 05:47 बजे और सूर्यास्त शाम 07:12 बजे होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में और सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य इस समय राहु के आर्द्रा नक्षत्र में स्थित हैं। वहीं, चंद्रमा दोपहर तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहने के बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। रात 12:59 बजे तक शुभ योग रहेगा और फिर शुक्ल योग शुरू होगा।

दिन के मध्य में रहेगा सबसे शक्तिशाली अभिजित मुहूर्त

यदि आप किसी नए काम या बिजनेस की शुरुआत करना चाहते हैं, तो दोपहर 11:56 बजे से 12:52 बजे तक का अभिजित मुहूर्त सबसे बेस्ट रहेगा। इसे दिन का सबसे शक्तिशाली और फलदायी समय माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे ज्यादा होती है और बाधाएं दूर होती हैं।

अशुभ राहुकाल और गुलिक काल के दौरान यात्रा से बचें

रविवार को शाम 05:38 बजे से लेकर 07:22 बजे तक राहुकाल का समय रहेगा। इसके अलावा दोपहर 03:53 बजे से 05:38 बजे तक गुलिक काल और दोपहर 12:30 बजे से 02:10 बजे तक यमघण्टकाल रहेगा। इन अशुभ समयों में कोई भी नया काम शुरू न करें। साथ ही इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बचें।

ज्योतिष एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि 28 जून को पश्चिम दिशा में यात्रा करना बहुत जरूरी हो, तो घर से निकलने से पहले पंचांग के विशेष उपायों का पालन करना चाहिए। इस दिन दलिया, घी या पान खाकर यात्रा शुरू करने से दिशाशूल का दोष कम हो जाता है। रविवार के दिन भगवान सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना भी विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

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