Uttar Pradesh News: साढ़े तीन दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस ने अब वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य में हाशिये पर खड़ी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा दांव खेलते हुए दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया है।
अविनाश पांडेय की छुट्टी, अंबेडकरवादी राजनीति पर भरोसा
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अविनाश पांडेय को उनके पद से हटाकर राजेंद्र पाल गौतम को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अनुसूचित जाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम अपनी आक्रामक अंबेडकरवादी और सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम के साथ काम कर चुके गौतम के जरिए कांग्रेस की नजर राज्य के बड़े दलित वोट बैंक पर है।
राजेंद्र पाल गौतम पूर्व में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। हाल ही में वह बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने पहुंचे थे, जिसके बाद से ही कांग्रेस-बसपा के बीच राजनीतिक गठबंधन की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि मायावती ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया था।
तीन दशक बाद किसी दलित नेता को मिला प्रभार
कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो करीब तीन दशक पहले वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे को प्रदेश प्रभारी बनाया गया था। उनके बाद से लगातार सवर्ण या मुस्लिम नेताओं को ही यह कमान मिलती रही। प्रियंका गांधी के बाद अविनाश पांडेय ने जिम्मेदारी संभाली, जिनके कार्यकाल में पार्टी ने सपा के साथ लोकसभा चुनाव में छह सीटें जीतीं, लेकिन उनका क्षेत्रीय अध्यक्षों से बेहतर तालमेल नहीं था।
संगठनात्मक बदलाव के इस दौर में अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय को भी बदले जाने की राजनीतिक चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। जातीय संतुलन साधने के लिए पार्टी आराधना मिश्र मोना या सांसद राकेश राठौर को नया अध्यक्ष बना सकती है, जबकि सहारनपुर के कद्दावर सांसद इमरान मसूद को भी संगठन में कोई बड़ा रोल मिल सकता है।

