Bihar MLC Election: उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का टिकट कटने से एनडीए में भारी घमासान, क्या अधूरा रह गया भाजपा का वादा?

Bihar News: बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर अचानक राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी का टिकट नहीं मिलने से पूरी राज्य सरकार हैरान है।

पटना में पत्रकारों ने जब पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा से सीट के वादे पर सीधा सवाल किया, तो उनका दर्द छलक उठा। उन्होंने सीधे भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि जिसने वादा किया था, आप जाकर उसी से यह सवाल क्यों नहीं पूछते।

उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से कहा कि इस मुद्दे पर ज्यादा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भाजपा की एक कथित गोपनीय चिट्ठी पर भी अपना बड़ा बयान दिया, जिसमें सीट बंटवारे की बातें लिखी हुई थीं।

चिट्ठी विवाद और बेटे के मंत्री पद पर दी सफाई

कुशवाहा ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि वह वायरल चिट्ठी भाजपा की तरफ से जारी की गई है, तो उसका सही जवाब केवल भाजपा नेतृत्व ही दे सकता है। वे इस विषय पर अपनी तरफ से कोई भी टिप्पणी बिल्कुल नहीं करना चाहते।

इसके साथ ही उन्होंने बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को पद से हटाने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब दीपक प्रकाश ने शपथ ली थी, तब भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे।

उन्होंने याद दिलाया कि उनके बेटे को मंत्री बने अभी केवल एक महीना ही हुआ है। इस कारण नियमों के तहत उनके मंत्री पद पर कोई खतरा नहीं है। इसके तुरंत बाद उपेंद्र कुशवाहा अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला और एनडीए में नाराजगी

दिल्ली जाने से पहले कुशवाहा ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक पर भी करारा हमला बोला। उन्होंने डीएमके के शामिल नहीं होने पर तंज कसते हुए कहा कि यह पूरी तरह से केवल स्वार्थी और अवसरवादी लोगों का एक कमजोर गठबंधन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सभी दल देशहित को छोड़कर सिर्फ अपने निजी राजनीतिक फायदों के लिए काम कर रहे हैं। जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे टिकट कटने से नाराज हैं, तो उन्होंने कहा कि कोई नाराजगी नहीं है।

इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद अब बिहार एनडीए के भीतर आपसी तालमेल को लेकर कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगियों की सीटों का यह विवाद आगे और बढ़ सकता है।

Author: Amit Yadav

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