हिमाचल सरकार के फैसलों पर कोर्ट की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, क्या बैकफुट पर आ गए मुख्यमंत्री सुक्खू?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां लगातार अदालतों में खारिज हो रही हैं। मंडी के सराज में एक जनसभा के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के फैसलों से विधानसभा की गरिमा गिर रही है। यह स्थिति सरकार की प्रशासनिक विफलताओं और असंवैधानिक निर्णयों को साफ दर्शाती है।

भर्ती कानून को हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक

जयराम ठाकुर ने सरकारी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े ‘विधेयक 2024’ का विशेष जिक्र किया। हिमाचल हाईकोर्ट ने हाल ही में इसे असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है। ठाकुर ने बताया कि विपक्ष ने विधानसभा में पहले ही सरकार को चेताया था। इसके बावजूद सरकार ने संख्या बल के दम पर इसे पारित कराया। उन्होंने दावा किया कि यह कानून कर्मचारियों के अधिकारों का हनन करने और जिम्मेदारियों से भागने की एक सोची-समझी कोशिश थी।

अदालतों में लगातार हार रही है सुक्खू सरकार

पूर्व मुख्यमंत्री ने उन मामलों की लंबी सूची गिनाई जिनमें सरकार को अदालत से झटका लगा है। उन्होंने सीपीएस नियुक्तियों और बागी विधायकों की पेंशन रोकने जैसे फैसलों का उदाहरण दिया। जयराम ठाकुर के अनुसार वाटर कमीशन का गठन और बिजली दरों से जुड़े फैसले भी कानूनी कसौटी पर फेल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार को हार मिली है। पंचायत चुनावों के प्रबंधन को लेकर भी न्यायपालिका ने सरकार को कई बार फटकार लगाई है।

विधानसभा की गरिमा बनाए रखने की अपील

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे भविष्य में ऐसे विवादास्पद फैसले लेने से बचें। जयराम ठाकुर ने कहा कि बार-बार फैसलों का रद्द होना लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वे विपक्ष के सुझावों को गंभीरता से लें। सरकार को अपनी जिद छोड़कर जनहित और संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नीतियां नहीं बदलीं, तो जनता का विश्वास सरकार से पूरी तरह उठ जाएगा।

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