Mumbai News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर पार्टी के भीतर ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राकांपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उनके अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया पर गहरी आपत्ति जताते हुए कानूनी नोटिस भेजा है।
दिल्ली की एक प्रतिष्ठित कानूनी फर्म के माध्यम से राकांपा के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने यह नोटिस जारी किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए 26 फरवरी को हुआ चुनाव पूरी तरह से असंवैधानिक था, इसलिए इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।
अजित पवार के निधन के बाद शुरू हुआ विवाद
नोटिस के अनुसार, 28 जनवरी को तत्कालीन राकांपा अध्यक्ष अजित पवार के दुखद निधन के बाद निर्वाचन आयोग को बताया गया था कि प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक अध्यक्ष रहेंगे। आरोप है कि इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया गया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इस चुनाव में पार्टी के संविधान का पालन नहीं किया गया। प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों के नामांकन, चुनाव लड़ने या मतदान करने की उचित सूचना और अवसर नहीं दिए गए। साथ ही, केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण या निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति भी नहीं की गई थी।
पार्टी प्रवक्ता ने दावों को किया खारिज
सच्चिदानंद सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए उन पत्रों को वापस लेने की मांग की है, जिनमें नए पदाधिकारियों का विवरण दर्ज है। उन्होंने निष्पक्ष निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने के लिए पार्टी नेतृत्व को 15 दिनों का समय दिया है, ऐसा न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
दूसरी तरफ, राकांपा प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि सच्चिदानंद सिंह खुद 26 फरवरी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार का समर्थन किया था। प्रवक्ता के मुताबिक, चुनाव में सभी नियमों का पालन हुआ है।

