Shimla News: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का शोर चरम पर है। राज्य में कल यानी 26 मई से पहले चरण का मतदान शुरू होने जा रहा है। इस चुनावी माहौल के बीच ग्रामीण इलाकों से युवाओं की एक बेहद हैरान करने वाली मांग सामने आई है।
प्रत्याशियों के विकास के दावों के बीच अनोखी मांग
चुनाव में प्रधान से लेकर पंच पद तक का हर प्रत्याशी विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। कोई प्रत्याशी नालियां पक्की करने की बात कह रहा है, तो कोई रास्तों पर टाइल्स लगाने का वादा कर रहा है। जिला परिषद और बीडीसी उम्मीदवार भी गांवों में सोलर लाइट लगाने के लोकलुभावन वादे बांट रहे हैं।
इन तमाम पारंपरिक वादों के बीच प्रत्याशियों का ध्यान युवाओं के एक बेहद अनोखे और संवेदनशील मुद्दे की तरफ बिल्कुल नहीं गया। चुनाव प्रचार के दौरान कई गांवों के युवाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। युवाओं ने कहा कि नेता घर आकर वोट तो मांग रहे हैं, लेकिन उनकी असली समस्या पर सब चुप हैं।
ढलती उम्र और जीवनसाथी की तलाश बना बड़ा मुद्दा
गांव के अविवाहित नौजवानों को यह कहते सुना गया कि काश कोई ऐसा प्रत्याशी आता, जो चुनाव जीतने के बाद उनकी शादी करवाने का जिम्मा उठाता। युवाओं की मांग है कि पंचायत का कोई भी योग्य युवक कुंवारा न रहे। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ग्रामीण युवाओं का यह सबसे बड़ा दर्द है।
पहाड़ी राज्य के गांवों में मौजूदा समय में युवाओं की उम्र तेजी से निकल रही है। आज हर गांव में ऐसे कई पढ़े-लिखे युवक मिल जाएंगे, जिनकी उम्र 35 से 40 साल के पार हो चुकी है। वे अपनी आजीविका के लिए अच्छा रोजगार भी कमा रहे हैं, लेकिन वे अब तक कुंवारे हैं।
रोजगार के बाद भी नहीं मिल पा रही जीवनसाथी
युवा अपने और परिवार का पेट पालने के लिए किसी न किसी रूप में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद वे लंबे समय से एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश में भटक रहे हैं। इन कुंवारे नौजवानों का कहना है कि सड़क और नाली से ज्यादा जरूरी अब उनके लिए घर बसाने की गंभीर समस्या हो गई है।
नौजवानों का मानना है कि जो जनप्रतिनिधि उनके घर बसाने में मदद का भरोसा देगा, वही उनका असली नेता होगा। फिलहाल राजनीतिक दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों के पास युवाओं के इस सामाजिक दर्द का कोई ठोस जवाब नहीं है। अब देखना होगा कि कल होने वाले मतदान में युवा क्या रुख अपनाते हैं।
Author: Sunita Gupta

