Shimla News: हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के सैंपल फेल होने के मामले पर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने अब तक की गई सुस्त कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि पुरानी दोषी कंपनियों पर आखिरकार क्या एक्शन लिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दवा उद्योग की साख पर जताई चिंता
पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पूरे देश के दवाई उद्योग में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से विशेष अपील की है कि दवाओं की गुणवत्ता से समझौता करने वाली कंपनियों के खिलाफ पूरी जांच बिठाई जाए और सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
दवा नियंत्रक के दावों को शांता कुमार ने घेरा
शांता कुमार ने राज्य के दवा नियंत्रक डॉक्टर मुनीष कपूर के बयानों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ड्रग कंट्रोलर की तरफ से बार-बार दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का दावा किया जाता है। लेकिन धरातल पर अब तक क्या कार्रवाई अमल में लाई गई, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं है।
पिछले 5 महीनों में 264 दवाओं के सैंपल फेल
आंकड़ों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले महज 5 महीनों के भीतर हिमाचल प्रदेश की 264 दवाइयों के सैंपल फेल हो चुके हैं। यह स्थिति जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने दवा नियंत्रक से पिछले साल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
जनता के सामने सच लाए सरकार और ड्रग कंट्रोलर
शांता कुमार ने तीखे लहजे में कहा कि पिछले वर्ष भी सूबे में सैकड़ों दवाइयों के सैंपल फेल पाए गए थे। उन्होंने ड्रग विभाग से पूछा है कि उन पुरानी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई हुई, यह जानकारी तुरंत जनता के बीच साझा की जानी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

