Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है। प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजा विजेंद्र सिंह का बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली के एक अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर है।
राजा विजेंद्र सिंह विशेष रूप से नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय थे। वे इस क्षेत्र से लंबे समय तक जनप्रतिनिधि के रूप में चुने जाते रहे। उनके निधन से उनके परिवार, समर्थकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को गहरा सदमा लगा है। सभी ने इस दुखद घड़ी में अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
नालागढ़ रियासत के शाही परिवार में हुआ था जन्म
दिग्गज नेता राजा विजेंद्र सिंह का जन्म 26 जून 1946 को तत्कालीन नालागढ़ रियासत के एक सम्मानित शाही परिवार में हुआ था। वे अपने सरल, सौम्य और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के लिए समाज के हर वर्ग में पहचाने जाते थे। उन्होंने हमेशा जनहित के बड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
एक विशेष संयोग यह भी रहा कि बीते सप्ताह ही उनके परिवार और शुभचिंतकों ने उनका 80वां जन्मदिन बड़े उत्साह से मनाया था। जानकारों के मुताबिक उनका कोई पुरुष वारिस नहीं है। उनके परिवार में दो बेटियां और उनकी पत्नियां रानी साहिबा और बन्नो शामिल हैं, जो इस समय गहरे शोक में हैं।
शाही किले को रिजॉर्ट में बदला, आज होती है फिल्मों की शूटिंग
राजा विजेंद्र सिंह नालागढ़ रियासत के अंतिम शासक राजा सुरेंद्र सिंह के पुत्र थे। वे पांच मई 1971 को आधिकारिक रूप से राजा की गद्दी पर आसीन हुए थे। उन्होंने अपने ऐतिहासिक पैतृक किले को बहुत ही खूबसूरत तरीके से आज भी सहेज कर रखा हुआ था।
वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक शाही संपत्ति को प्रसिद्ध नालागढ़ फोर्ट रिजॉर्ट के नाम से जाना जाता है। इस खूबसूरत किले के दीदार के लिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं। इसकी लोकप्रियता के कारण यहां कई बार बड़ी बॉलीवुड फिल्मों और शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग भी की जाती है।
लगातार पांच बार नालागढ़ से विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड
विजेंद्र सिंह ने वर्ष 1977 से लेकर 1998 तक लगातार पांच बार हिमाचल विधानसभा में नालागढ़ क्षेत्र का गौरवशाली प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा। वे पहली बार साल 1977 में जनता की भारी बहुमत से विधायक चुने गए थे।
इसके बाद वे लगातार 1982, 1985, 1990 और फिर 1993 के चुनाव में अजेय रहे। जब प्रदेश में मुख्यमंत्री राम लाल ठाकुर की सरकार थी, तब उन्हें मुख्य संसदीय सचिव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। उनका जाना प्रदेश के लिए एक अपूरणीय राजनीतिक क्षति है।

