CBSE Three Language Formula: सीबीएसई स्कूलों में 1 जुलाई से लागू होगा नया नियम, छात्रों को पढ़नी होंगी तीन भाषाएं

Delhi News: सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने देश के सभी स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। बोर्ड ने आगामी 1 जुलाई से सभी विद्यालयों में ‘थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला’ (त्रि-भाषा सूत्र) लागू करने का बड़ा आदेश दिया है।

यह नया नियम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत बनाया गया है। इसके साथ ही यह नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE 2023) के प्रावधानों को भी पूरा करता है। बोर्ड के आदेश के बाद यह नियम देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

सीबीएसई द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक नए शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9वीं के छात्रों को अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं सीखनी होंगी। इस नीति के तहत प्रत्येक छात्र को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक फॉरेन लैंग्वेज यानी विदेशी भाषा की पढ़ाई करना बेहद जरूरी होगा।

जानिए छात्रों के पास भाषा चुनने के क्या विकल्प हैं

बोर्ड ने विद्यार्थियों के लिए भाषा चुनने की प्रक्रिया को बेहद स्पष्ट और सीधा रखा है। नए नियमों के अनुसार छात्रों को मुख्य रूप से दो भारतीय भाषाओं का चयन करना होगा। बोर्ड ने इस व्यवस्था में अंग्रेजी भाषा को पूरी तरह विदेशी भाषा की श्रेणी में शामिल किया है।

छात्र अंग्रेजी के अलावा अन्य विदेशी भाषाओं का विकल्प भी आसानी से चुन सकते हैं। इन विकल्पों में कोरियन, जापानी, फ्रेंच, जर्मन और स्पैनिश जैसी वैश्विक भाषाएं शामिल हैं। छात्र अपनी रुचि के अनुसार इनमें से किसी एक पसंदीदा विदेशी भाषा का चयन कर सकते हैं।

चूंकि बोर्ड ने अंग्रेजी को विदेशी कैटेगरी में रखा है, इसलिए छात्रों के सामने एक असमंजस की स्थिति बन गई है। छात्र या तो अंग्रेजी भाषा पढ़ सकते हैं या फिर किसी अन्य विदेशी भाषा का चुनाव कर सकते हैं। इससे कई छात्रों को विषय चयन में थोड़ी परेशानी हो सकती है।

किताबों की कमी और शिक्षकों की कमी पर निर्देश

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 9वीं के लिए तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। जब तक नई किताबें नहीं आतीं, तब तक सभी छात्र कक्षा 6 की तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तक (सत्र 2026-27 संस्करण) से अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे।

बोर्ड ने स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भी वैकल्पिक उपाय सुझाया है। स्कूलों में जब तक नए भाषा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक प्रिंसिपल दूसरे विषयों के अध्यापकों की मदद लेकर इस अनिवार्य पढ़ाई को सुचारू रूप से जारी रखेंगे।

तमिलनाडु सहित देश के कई दक्षिण भारतीय राज्य इस नीति का लगातार कड़ा विरोध कर रहे हैं। इन राज्यों का आरोप है कि केंद्र सरकार इस फॉर्मूले के जरिए छात्रों पर जबरन हिंदी थोप रही है। तमिलनाडु सरकार ने इस नए नियम को मानने से साफ इनकार कर दिया है।

तमिलनाडु सरकार के मुताबिक उनके राज्य के विकास के लिए तमिल और अंग्रेजी भाषा का द्वि-भाषी फॉर्मूला ही काफी है। इसके जवाब में सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी है। बोर्ड ने सभी राज्यों को अपनी इच्छानुसार भाषा चुनने की पूरी आजादी दी है।

क्या इस तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा होगी?

सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों के एक बड़े डर को दूर करते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। बोर्ड ने कहा कि इस तीसरी भाषा के लिए कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी। सभी स्कूल अपने स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) के जरिए परीक्षा लेंगे।

स्कूल स्तर पर होने वाले इस मूल्यांकन के अंक छात्रों के अंतिम प्रगति पत्र में जरूर दिखाई देंगे। बोर्ड के मुताबिक वार्षिक प्रमाण पत्र में इस तीसरी भाषा के प्राप्तांकों को ग्रेड या नंबर के रूप में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा, ताकि छात्रों का प्रोफाइल मजबूत हो सके।

Author: Rashmi Sharma

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