New Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की गुजरात इकाई द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इस याचिका में पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट्स को निलंबित करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले को उन अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है, जिनमें बिना पूर्व नोटिस के इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स और पोस्ट ब्लॉक करने की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
आईटी एक्ट की धारा 79 पर उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान ‘आप’ की ओर से वरिष्ठ वकील शादान फरासात ने अधिकारियों की कानूनी कार्रवाई के आधार को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की जिस धारा 79 (3)(बी) का सहारा लिया है, वह इस मामले में लागू ही नहीं होती है। वकील ने अदालत को बताया कि यह धारा मूल रूप से मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए एक ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान है, न कि किसी के अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने या अकाउंट बंद करने का कोई दंडात्मक हथियार।
क्या है याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग?
आम आदमी पार्टी ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि धारा 79 (3)(बी) का उपयोग किसी भी इंटरनेट मीडिया अकाउंट को पूरी तरह बंद करने के लिए नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया है कि बिना किसी ठोस आधार और प्रक्रिया के अकाउंट्स को सस्पेंड करना असंवैधानिक है। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया आज के समय में जनता तक अपनी बात पहुंचाने का प्रमुख माध्यम है और इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
समान मामलों के साथ होगी विस्तृत सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को व्यापक संदर्भ में देखने का फैसला किया है। अब इस पर अन्य उन याचिकाओं के साथ सुनवाई होगी जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा मनमाने ढंग से कंटेंट हटाने या अकाउंट ब्लॉक करने को चुनौती दी गई है। पीठ ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। इस मामले के नतीजे से भविष्य में सोशल मीडिया रेगुलेशन और यूजर्स के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय होने की उम्मीद है। मामले की अगली सुनवाई अब नियमित पीठ के समक्ष होगी।


