जेबीटी शिक्षकों की वरिष्ठता मेरिट लिस्ट से तय होगी, जॉइनिंग डेट से नहीं, हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने जूनियर बेसिक टीचर यानी जेबीटी की वरिष्ठता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि देश के कानून के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों की सिनियोरिटी केवल चयन प्रक्रिया की मेरिट लिस्ट के आधार पर ही तय हो सकती है।

- Advertisement -

मेरिट सूची के आधार पर तय होगी वरिष्ठता

न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की सिंगल बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि ड्यूटी जॉइन करने की तारीख से कर्मचारियों की वरिष्ठता तय नहीं होगी। इसके साथ ही शिक्षा विभाग को जेबीटी की वरिष्ठता सूची नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा बार-बार बदले गए स्टैंड पर बेहद तीखी टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पिछली तारीखों से पूरे फाइनेंशियल बेनिफिट्स के साथ प्रमोशन देने का भी आदेश जारी किया है। इस ऐतिहासिक फैसले से पीड़ित शिक्षकों को सालों बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

जूनियर शिक्षकों को पहले दे दिया था प्रमोशन

यह मामला साल 1995 का है, जब अनुसूचित जाति वर्ग के एक शिक्षक को सिरमौर के सराहान ब्लॉक में बैचवाइज रेगुलर जेबीटी नियुक्त किया गया था। शिक्षा विभाग ने साल 2002 में नियमों को ताक पर रखकर जॉइनिंग डेट के आधार पर फाइनल सिनियोरिटी लिस्ट जारी कर दी।

- Advertisement -

विभाग की इस बड़ी लापरवाही के कारण याचिकाकर्ता को सूची में काफी नीचे धकेल दिया गया था। साल 2006 में भी यही गड़बड़ी जारी रही, जिसकी वजह से प्रार्थी से कम अंक पाने वाले उनके जूनियर शिक्षकों को पहले ही ‘हेड टीचर’ के पद पर प्रमोट कर दिया गया। पीड़ित ने साल 2015 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने सरकार की अजीब दलीलें खारिज कीं

मामले की सुनवाई के दौरान विभाग ने एफिडेविट फाइल कर दावा किया कि 1994 में हुए इंटरव्यू के आधार पर नियुक्तियां हुई थीं और साल 2017 में इसका पुराना रिकॉर्ड नष्ट कर दिया गया। इस पर कोर्ट ने कड़ा सवाल उठाया कि जब मुख्य परीक्षा का रिजल्ट 1995 में आया, तो 1994 में मेरिट कैसे बन सकती है?

अदालत ने कहा कि जब शिक्षक साल 2015 से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था, तो विभाग ने 2017 में रिकॉर्ड क्यों नष्ट किया? यह सीधे तौर पर याचिकाकर्ता के साथ अन्याय करने का प्रयास है। कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि प्रार्थी ने 2023 का प्रमोशन ले लिया है, इसलिए केस बंद होना चाहिए।

तीन महीने में वित्तीय लाभ देने का आदेश

हाई कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए कि वह जेबीटी परीक्षा के मूल अंकों के आधार पर नई सूची बनाए। प्रार्थी को अगस्त 2006 से ‘हेड टीचर’ और जून 2012 से ‘सेंट्रल हेड टीचर’ के पद पर काल्पनिक रूप से प्रमोट माना जाए, जब उनके जूनियर्स को यह लाभ दिया गया था।

सरकार को तीन महीने के भीतर इस आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता के सभी वित्तीय लाभ और सैलरी एरियर जारी करने होंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो पेंडिंग अमाउंट पर 6% वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles