क्रिप्टोकरेंसी पर रिजर्व बैंक का रुख सख्त, विदेशी एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग से बढ़ी कर विभाग की चिंता

Mumbai: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते कारोबार को लेकर एक बार फिर अपना सख्त रुख दोहराया है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक अब भी क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है, क्योंकि इससे देश की वित्तीय स्थिरता को बड़ा खतरा है।

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दूसरी तरफ, आयकर विभाग ने भी इस मामले में सरकार को आगाह किया है। कर अधिकारियों का कहना है कि विदेशी एक्सचेंजों के जरिए होने वाले क्रिप्टो लेनदेन और ट्रेडिंग पर बारीकी से नजर रखना बेहद मुश्किल काम है, जिससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की आशंका बनी रहती है।

न्यायालय के आदेश के बाद भी देश में नीतिगत भ्रम बरकरार

देश में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर पिछले कई सालों से नीतिगत अस्पष्टता का माहौल बना हुआ है। साल 2018 में रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय बैंक द्वारा लगाए गए इस बैंकिंग प्रतिबंध को पूरी तरह रद्द कर दिया था।

इस फैसले के बाद निजी क्रिप्टोकरेंसी को नियंत्रित करने के लिए साल 2021 में एक विशेष मसौदा कानून तैयार किया गया था। सरकार इस ड्राफ्ट बिल को कभी संसद पटल पर पेश नहीं कर सकी। इसके साथ ही इस गंभीर विषय पर जारी होने वाला चर्चा पत्र भी बार-बार टलता रहा है।

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नवाचार और वित्तीय संप्रभुता के बीच संतुलन जरूरी

केंद्र सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र के लिए भविष्य में बनने वाली किसी भी नीति में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके साथ ही देश की मौद्रिक संप्रभुता, वित्तीय स्थिरता और आम उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों के बीच एक मजबूत संतुलन बनाना भी बेहद आवश्यक होगा।

वित्त मंत्रालय ने आंतरिक बैठकों के बाद सीमित नियामक स्पष्टता का समर्थन किया था। अधिकारियों का कहना था कि देश के मौजूदा कानून इस नई परिसंपत्ति से जुड़े बुनियादी जोखिमों से निपटने में सक्षम हैं। लेकिन नए दस्तावेज अधिकारियों की बढ़ती चिंता और वित्तीय जोखिमों की तरफ साफ इशारा करते हैं।

वैश्विक स्तर पर स्टेबलकॉइंस को मिल रही है हरी झंडी

इस पूरे संवेदनशील मामले पर फिलहाल वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ने अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया साझा नहीं की है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात बदल रहे हैं। अमेरिका में हालिया नीतिगत बदलावों के बाद वैश्विक बाजार में क्रिप्टोकरेंसी को अधिक कानूनी स्वीकार्यता मिलने लगी है।

खासकर अमेरिकी बाजार में स्टेबलकॉइंस के उपयोग को बढ़ावा देने वाले नए नियमों के आने से दुनिया भर में इनके इस्तेमाल में बड़ी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में वैश्विक रुख को देखते हुए भारत सरकार के अगले कदम पर सभी निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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