Delhi News: हर साल लाखों लोग अपने दिल की सेहत का आकलन करने के लिए पारंपरिक कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते हैं। आमतौर पर डॉक्टर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ के आधार पर ही मरीजों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक के खतरे का आकलन करते हैं।
JAMA की नई स्टडी में दावा, केवल बैड कोलेस्ट्रॉल की जांच दिल की सेहत के लिए काफी नहीं
हाल ही में प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल JAMA में प्रकाशित एक नई स्टडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल LDL की जांच हर व्यक्ति के हृदय रोग के जोखिम का सटीक आकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। इसके लिए एक खास टेस्ट ज्यादा मददगार है।
अध्ययन के मुताबिक एपोलिपोप्रोटीन B (ApoB) टेस्ट दिल की बीमारी के वास्तविक खतरे का बहुत अधिक सटीक संकेतक साबित हो सकता है। यह आधुनिक टेस्ट खून में मौजूद उन सभी हानिकारक लिपोप्रोटीन कणों की कुल संख्या को मापता है जो धमनियों में प्लाक जमा करते हैं।
जानिए पारंपरिक लिपिड प्रोफाइल और आधुनिक ApoB टेस्ट के बीच का मुख्य अंतर
सामान्य लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (HDL) और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दो अलग-अलग लोगों का LDL स्तर समान होने पर भी उनके रक्त में हानिकारक लिपोप्रोटीन कणों की संख्या बिल्कुल अलग हो सकती है।
चूंकि प्रत्येक कण धमनियों में ब्लॉकेज बनाने में भूमिका निभा सकता है, इसलिए केवल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जोखिम की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। दूसरी ओर, ApoB एक ऐसा प्रोटीन है जो प्रत्येक हानिकारक लिपोप्रोटीन कण की सतह पर मौजूद होता है, जिससे सही संख्या पता चलती है।
डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी यह जांच
डायबिटीज, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम या हाई ट्राइग्लिसराइड्स से पीड़ित लोगों में अक्सर LDL का स्तर सामान्य दिखाई देता है। इसके बावजूद उनके शरीर में हानिकारक कणों की संख्या अधिक हो सकती है। ऐसे मरीजों में ApoB टेस्ट उन छिपे हुए जोखिमों की सटीक पहचान कर सकता है।
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रिवेंटिव मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सियारान कोहली-लिंच के मुताबिक, ApoB के आधार पर स्टैटिन थेरेपी या इलाज तय करने से पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक संख्या में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों को समय रहते रोका जा सकता है।
कंप्यूटर मॉडलिंग के नतीजों में पाया गया कि ApoB स्तर को आधार बनाने से डॉक्टरों को उन मरीजों की जल्दी पहचान करने में मदद मिलती है, जिन्हें तत्काल कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं की आवश्यकता होती है। इसे पारंपरिक टेस्ट के एक बेहतरीन अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए।

