Shimla News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को राज्य के ऐतिहासिक जल कानूनों के पहले संकलन का विमोचन किया। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को जल शक्ति विभाग ने विशेष रूप से तैयार किया है। इसमें राज्य के जल प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले सभी प्रमुख अधिनियम, नियम, नीतियां और प्रशासनिक सर्कुलर एक ही जगह उपलब्ध कराए गए हैं।
अधिकारियों और इंजीनियरों के लिए बनेगा गाइडबुक
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह नया प्रकाशन सरकारी अधिकारियों, इंजीनियरों, कांट्रैक्टर्स और आम जनता के लिए एक प्रामाणिक रेफरेंस डॉक्यूमेंट का काम करेगा। इसके माध्यम से पूरे राज्य में वाटर सप्लाई, सीवरेज सिस्टम और सिंचाई सुविधाओं के वितरण में पारदर्शिता आएगी। सरकार इस कदम से सिस्टम के भीतर जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत करना चाहती है।
दशकों पुराने कानूनी नियमों का हुआ एकीकरण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग के बेहतरीन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम ने कई दशकों में विकसित हुए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक प्रावधानों को एक जगह इकट्ठा किया है। यह अनूठा संकलन विभिन्न डिवीजनों, सर्किलों और क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को सही समय पर सटीक निर्णय लेने में मदद करेगा।
जल जीवन मिशन में हिमाचल बना देश का रोल मॉडल
मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि हिमाचल प्रदेश देश में जल जीवन मिशन को लागू करने वाला अग्रणी राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने 99.9 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से साफ पानी पहुंचा दिया है। सतत जल प्रबंधन और शानदार पब्लिक सर्विस डिलीवरी के लिए राज्य को साल 2026 में नेशनल वाटर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
कांट्रैक्टर्स और नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ
यह प्रकाशन पूरे विभाग के लीगल और प्रोसीजरल फ्रेमवर्क को समझने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की तरह काम करेगा। इससे कांट्रैक्टर्स को टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय शक्तियों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही आम नागरिकों को वाटर टैरिफ, पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट और मान्यता प्राप्त वॉटर टेस्टिंग लैबोरेट्रीज की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

