Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर हुआ बवाल अब पूरी तरह कानूनी और सियासी रंग ले चुका है। कलेक्ट्रेट और कमिश्नरी गेट पर बिना परमिशन चक्काजाम करने, हंगामा मचाने और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में सिविल लाइंस पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।
अधिवक्ता रवि गौतम सहित 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गिरफ्तार किए गए एडवोकेट रवि गौतम सहित आठ नामजद आरोपियों को गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया। माननीय अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में चौधरी चरण सिंह जिला जेल भेज दिया है। पुलिस इस मामले में अन्य उपद्रवियों की भी तलाश कर रही है।
इस पूरे बवाल के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी, जब जाम खुलवाने पहुंचे मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने अपना आपा खो दिया था। उन्होंने पुलिस वैन के अंदर घुसकर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रवि गौतम को कई थप्पड़ जड़ दिए थे। इस लाठीचार्ज और थप्पड़ कांड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
वायरल फुटेज और सीसीटीवी से हो रही उपद्रवियों की पहचान
पुलिस ने इस हिंसक मामले में 13 नामजद और करीब 25 से 50 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस टीम अब वीडियो फुटेज और सीसीटीवी कैमरों के जरिए अन्य उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। जेल भेजे गए आरोपियों में गाजियाबाद के रवि गौतम और गौतमबुद्धनगर के दिग्विजय भाटी शामिल हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने बताया कि इस उग्र प्रदर्शन के मुख्य साजिशकर्ता दिग्विजय सिंह भाटी, रवि गौतम, सुशील गौतम और हिमांशु सिद्धार्थ हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, एआईएमआईएम नेता रवि गौतम के खिलाफ गाजियाबाद में मर्डर के दो मुकदमों सहित कुल चार क्रिमिनल केस दर्ज हैं, जिनकी हिस्ट्री खंगाली जा रही है।
अमरोहा से जिला बदर चल रहा आरोपी दिग्विजय भाटी फरार
दूसरे मुख्य आरोपी भाकियू अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी के खिलाफ अमरोहा और मेरठ में रंगदारी, धमकी और एससी-एसटी एक्ट समेत कुल नौ मुकदमे दर्ज हैं। वह 10 दिन पहले ही अमरोहा से जिला बदर हुआ था। फिलहाल वह फरार है और सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को बेकसूर बता रहा है।
एसएसपी का कहना है कि इन बाहरी राजनीतिक और अराजक तत्वों ने जानबूझकर महिलाओं और नाबालिगों को आगे कर भड़काया। इन लोगों ने मेरठ की कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने का प्रयास किया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छावनी में बदला पैतृक गांव थिरौट, नेताओं की एंट्री बैन
कलेक्ट्रेट पर हुए उग्र बवाल और लाठीचार्ज के बाद उपजे भारी तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने मृतका ललिता गौतम के पैतृक गांव थिरौट को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए गांव के सभी रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर कटीली बैरिकेडिंग की गई है।
प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति, सामाजिक संगठन या राजनीतिक दलों के नेताओं की आवाजाही पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। गांव में आने-जाने वाले हर ग्रामीण की सघन चेकिंग की जा रही है। पुलिस की सोशल मीडिया लैब भी इस मामले को जातिगत तूल देने वाले इंटरनेट अकाउंट्स पर पैनी निगरानी रख रही है।
चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस का आज दौरा, मानवाधिकार आयोग पहुंची शिकायत
भले ही प्रशासन ने गांव में एंट्री बैन कर दी हो, लेकिन इस मुद्दे पर सियासत चरम पर पहुंच गई है। यूपी कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई की जांच के लिए 30 से 32 सदस्यीय एक बड़ा डेलीगेशन गठित किया है, जो शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचेगा। इसके साथ ही नगीना सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे हैं।
दूसरी ओर, पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने मेरठ पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में फॉर्मल कंप्लेंट दर्ज कराते हुए मांग की है कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस वाहन के अंदर हुई मारपीट के इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को सुरक्षित रखा जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप, विवेचना पर उठे सवाल
यह पूरा मामला रोहटा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। बीए थर्ड ईयर की दलित छात्रा ललिता गौतम बीते 15 मई को अपने घर से कॉलेज की परीक्षा देने के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसी दिन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके दो दिन बाद, 17 मई को रोहटा के उकसिया गांव के एक गन्ने के खेत से ललिता का रक्तरंजित शव बरामद हुआ था।
परिजनों ने तब गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। पुलिस ने तफ्तीश के बाद मुख्य आरोपी अंकुश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में अंकुश ने कुबूल किया था कि उसका पिछले 3 साल से ललिता के साथ प्रेम प्रसंग था, लेकिन उसे ललिता पर किसी दूसरे युवक से बात करने का शक हो गया था।
इसी रंजिश और विवाद में अंकुश ने अपने साथियों के साथ मिलकर ललिता की गला दबाकर हत्या कर दी थी। पुलिस का दावा है कि केस का खुलासा कर सभी मुख्य आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार और दलित समाज का आरोप है कि इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी के भाई (जो पीएसी में सिपाही है) और उसकी मां की भूमिका की पुलिस ने जांच नहीं की और विवेचना में लापरवाही बरती। इसी मांग को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट पर दलित महापंचायत बुलाई गई थी, जो बाद में हिंसक बवाल में बदल गई।

