Kullu News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मनाली, सोलांग घाटी और लाहुल-स्पीति में कचरा प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि नदी किनारे कचरा प्रसंस्करण नियमों के खिलाफ है। प्रशासन को अब नई जगह चिह्नित करनी होगी।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किए हैं। अदालत ने मनाली और व्यास नदी में बढ़ रहे प्रदूषण के मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने साफ कहा कि पर्यावरण नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए।
नदी से 100 मीटर दूर स्थापित हो नया प्लांट
हाई कोर्ट ने माना कि वर्तमान मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी प्लांट व्यास नदी के बिल्कुल करीब है। यहां गीले कचरे का प्रसंस्करण करना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के तहत ऐसा कोई भी प्लांट नदी से 100 मीटर दूर होना चाहिए।
इस नियम के तहत हाई कोर्ट ने कुल्लू के उपायुक्त को नई साइट चिह्नित करने का सख्त आदेश दिया है। वर्तमान में एक नई कंपनी द्वारा इस प्लांट की कार्य क्षमता को बढ़ाकर अब 200 टन प्रतिदिन तक कर दिया गया है। इससे काम में तेजी आएगी।
पुराने कचरे को साफ करने के लिए मांगा समय
अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 78,463 मीट्रिक टन में से 54,317 मीट्रिक टन पुराने कचरे का सफलतापूर्वक निपटारा किया जा चुका है। प्रशासन ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि शेष बचे पुराने कचरे को पूरी तरह साफ करने में 8 महीने लगेंगे।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 11 पंचायतों और मनाली पर्यटन विकास परिषद क्षेत्र से मिश्रित कचरा आ रहा है। कुल कचरे में से 85% कचरा बिना अलग किए ही प्लांट पहुंच रहा है, जिससे प्रसंस्करण करने में काफी परेशानी हो रही है।
कचरा अलग करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का निर्देश
अदालत ने कचरा जमा करने वाले मुख्य स्रोतों को निर्देश दिया है। उन्होंने कचरे को शुरुआत में ही सूखा और गीला अलग करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। इससे कचरे का सही तरीके से निपटारा करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने एसडीएम-सह-सदस्य सचिव साडा लाहुल-स्पीति को निर्देश दिए हैं। उन्हें अगली सुनवाई से पहले प्लांट में बिजली की सुचारू आपूर्ति और कामकाज को लेकर नया स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फोटोग्राफिक साक्ष्य भेजने के निर्देश
अदालत ने स्थानीय निकायों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार काम करने को कहा है। कचरा हटाए जाने की प्रगति के फोटोग्राफिक साक्ष्य सीधे जिला कलेक्टर को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की गई है।

