ईरान से ‘सीजफायर’ के तुरंत बाद ट्रंप ने घुमाया पीएम मोदी को फोन, मिडिल ईस्ट में होने वाला है कोई बड़ा खेला?

Global News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ऐतिहासिक सीजफायर की पहल कर दी है। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन मिलाया। यह फोन कॉल कई मायनों में बेहद खास मानी जा रही है। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली सीधी बातचीत है। इससे पहले दोनों की बातचीत फरवरी में एक ट्रेड डील को लेकर हुई थी। आज दोनों के बीच वेस्ट एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य पर गंभीर चर्चा हुई है।

इस फोन कॉल का सबसे बड़ा एजेंडा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ही रहा। दोनों देशों ने इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह खुला रखने पर जोर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग एक-तिहाई तेल गुजरता है। ईरान इसी रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाकर दुनिया भर की तेल सप्लाई रोक रहा है। डोनाल्ड ट्रंप इस खतरे को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं।

वैश्विक तेल सप्लाई और भारत की अहम भूमिका

अगर ईरान के साथ यह सीजफायर सफल बनाना है तो ट्रंप को भारत की जरूरत होगी। वैश्विक तेल सप्लाई को सुरक्षित रखने में भारत की भूमिका सबसे अहम है। डोनाल्ड ट्रंप पश्चिम एशिया के इस भारी संकट को जल्द सुलझाना चाहते हैं। इसके लिए वह भारत को एक बहुत ही भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप की इस नई पहल से दुनिया भर में शांति की एक नई उम्मीद जगी है।

ट्रंप और मोदी की यह कॉल अचानक नहीं हुई है। इस बातचीत से ठीक 24 घंटे पहले एक बेहद अहम बैठक हुई थी। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लंबी चर्चा की थी। ऐसा माना जा रहा है कि रूबियो और जयशंकर ने ही इस बड़ी बातचीत का आधार तैयार किया था। इसी वजह से दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह अहम संवाद हो पाया।

फरवरी की शुरुआत में हुई बातचीत के बाद मिडिल ईस्ट में काफी खून बह चुका है। उस वक्त दोनों नेताओं के बीच सिर्फ व्यापार और टैरिफ पर चर्चा हुई थी। लेकिन अब दुनिया की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। आज की चर्चा का मुख्य केंद्र ‘ग्लोबल पीस’ और ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ रहा है। ट्रंप ने पीएम मोदी को ईरान के साथ अपनी शुरुआती बातचीत की पूरी जानकारी भी दी है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार पर असर

ट्रंप ने इस पूरे मामले में भारत से अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की है। अगर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद होता है तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ऐसे में मोदी और ट्रंप की यह शानदार जुगलबंदी काफी मायने रखती है। यह कूटनीतिक कदम वैश्विक बाजार के लिए किसी बड़े बूस्टर डोज से कम नहीं है। पूरी दुनिया की नजरें अब भारत और अमेरिका के इस अगले कदम पर टिकी हैं।

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