मिडिल ईस्ट युद्ध में कंगाल पाकिस्तान की एंट्री: शांति दूत या अमेरिका का मोहरा? जानिए पर्दे के पीछे का सच

Middle East News: मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग अब सिर्फ मिसाइलों और गोलियों तक सीमित नहीं है। इस युद्ध में अब एक ऐसे देश की एंट्री हो रही है जो खुद भारी आर्थिक संकट में डूबा है। हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की। पाकिस्तान अब एक ऐसी कूटनीतिक चाल चल रहा है जो इस पूरे युद्ध का रुख बदल सकती है। यह पहल मिडिल ईस्ट के हालात को या तो शांत करेगी या इसे और भी खतरनाक बना देगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक बड़ा फैसला लिया है। ईरान पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है। इसके बाद कूटनीति की एक बेहद खतरनाक बाजी शुरू हो चुकी है।

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान बना बैक चैनल

रिपोर्ट्स के अनुसार इस्लामाबाद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का नया केंद्र बनाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है। बल्कि पर्दे के पीछे से एक बैक चैनल बातचीत चल रही है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान के साथ तुर्की और खाड़ी देश भी शामिल हैं। ये सभी देश संदेशवाहक यानी मैसेज कैरियर का काम कर रहे हैं। इस संभावित कूटनीतिक बातचीत में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं। उनके साथ अमेरिका के विशेष दूत भी मौजूद रहेंगे। वहीं ईरान की तरफ से सीधे राष्ट्रपति का नाम सामने आ रहा है।

कर्ज में डूबा पाकिस्तान क्यों बनना चाहता है चौधरी?

यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आर्थिक रूप से कमजोर पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ क्यों बन रहा है? इसके तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। पहला कारण यह है कि पाकिस्तान खुद को एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पेश करना चाहता है। दूसरा कारण सऊदी अरब और अमेरिका से जुड़ा है। इस शांति पहल की शुरुआत असल में सऊदी अरब से ही हुई है। सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही सबसे पहले यह प्रस्ताव रखा था। तीसरा बड़ा कारण पाकिस्तान की अपनी रणनीतिक स्थिति है। अगर यह कूटनीतिक बातचीत सफल होती है तो पाकिस्तान को बड़ा राजनीतिक और आर्थिक फायदा मिलेगा।

शांति की आड़ में डबल गेम का अंदेशा

अब इस पूरी कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आता है। कुछ अहम रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि पाकिस्तान सिर्फ एक मध्यस्थ नहीं है। वह यहां एक बड़ा डबल गेम खेल रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ईरान को कूटनीतिक बातचीत में उलझाकर रखना चाहता है। इसका असली मकसद अमेरिका को एक रणनीतिक बढ़त दिलाना हो सकता है। आसान शब्दों में कहें तो पाकिस्तान यहां अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है। वह अपने कूटनीतिक फायदे के लिए ईरान के साथ बड़ा धोखा कर सकता है।

तेल सप्लाई ठप और नेतान्याहू की जिद

इस पूरे युद्ध का सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी इलाके से गुजरती है। ईरान ने फिलहाल इस समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक हमले नहीं रुकेंगे तब तक रास्ता नहीं खुलेगा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स लगातार अपने हमले तेज कर रही है। दूसरी तरफ इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि इजराइल की सैन्य कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। ऊपर से शांति और बातचीत का ढोंग जरूर चल रहा है लेकिन जमीन पर भीषण युद्ध जारी है।

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