Delhi News: भारत सरकार ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की ओर से कश्मीर और भारत के अन्य आंतरिक मसलों पर दिए गए बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली की ओर से सख्त लहजे में साफ कहा गया कि इस्लामाबाद को भारत के घरेलू मामलों पर गैर-जरूरी टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में एक आधिकारिक मीडिया बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति की ओर से की गई इन अनुचित टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करता है। भारत के आंतरिक प्रशासनिक मामलों में दखल देना उनका अधिकार क्षेत्र बिल्कुल नहीं है।
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वाला देश हमें न सिखाए मानवाधिकार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पड़ोसी देश को आईना दिखाते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान का खुद का मानवाधिकारों का रिकॉर्ड वैश्विक स्तर पर बेहद शर्मनाक रहा है। ऐसे में उनकी यह टिप्पणी पूरी तरह से बेहूदा और हास्यास्पद लगती है, क्योंकि पाकिस्तान खुद दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनके साथ लगातार अत्याचार करने का एक लंबा और कुख्यात इतिहास रहा है। इन कड़वी हकीकतों को देखते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयानों को केवल पाकिस्तान की नफरत और कट्टरता की राजनीति से प्रेरित एक जानबूझकर किया गया हमला माना जा सकता है।
जानिए आखिर पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने किस बात पर उगला था जहर
दरअसल पाकिस्तानी राष्ट्रपति के ये विवादित बयान भारतीय रेलवे की एक प्रशासनिक कार्रवाई के बाद आए हैं। भारतीय रेलवे ने वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीद मस्जिद के अवैध कब्जेदारों को 20 जून तक पूरा परिसर खाली करने का एक कानूनी नोटिस जारी किया है।
इस प्रशासनिक कदम पर पाकिस्तान राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर खतरा होने की झूठी चिंता जताई थी। जरदारी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यह कार्रवाई भारत के विघटन और स्थायी अराजकता का कारण बन सकती है। उन्होंने इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी।
अदालत के आदेश पर रेलवे परिसर से हटाया जा रहा अतिक्रमण
सच्चाई यह है कि भारतीय रेलवे का यह नोटिस केवल रेलवे की अपनी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने की एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। काशी रेलवे स्टेशन के बड़े विस्तार प्रोजेक्ट और वहां प्रस्तावित नए निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में यह कानूनी अभियान चला रहा है।
इस प्रोजेक्ट के तहत बीती 3 जून को भी रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित अजगैब शहीद मजार और एक अवैध ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त किया गया था। रेलवे विभाग की यह पूरी कार्रवाई भूमि स्वामित्व विवाद में माननीय अदालत द्वारा दिए गए स्पष्ट कानूनी आदेश के बाद ही पूरी सुरक्षा के बीच की जा रही है।
Author: Pallavi Sharma


