युद्ध की आहट और भारत की तैयारी: पीएम मोदी ने बुलाई मुख्यमंत्रियों की इमरजेंसी मीटिंग, क्या आने वाला है कोई बड़ा संकट?

National News: पश्चिम एशिया के सुलगते हालात और दुनिया भर में मंडराते युद्ध के बादलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार शाम पीएम मोदी देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ एक बेहद अहम बैठक करने जा रहे हैं। इस इमरजेंसी मीटिंग का केंद्र युद्ध के प्रभाव और देश की आंतरिक सुरक्षा है। ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ केंद्र और राज्य मिलकर इस वैश्विक संकट से निपटने की रणनीति बनाएंगे।

शाम 6:30 बजे सजेगी ‘वर्चुअल’ चौपाल

प्रधानमंत्री मोदी शाम साढ़े छह बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुखियाओं से संवाद करेंगे। इस चर्चा का मुख्य एजेंडा मौजूदा वैश्विक हालातों की समीक्षा करना है। सरकार चाहती है कि केंद्र और राज्यों के बीच ऐसा तालमेल हो कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सके। हालांकि, जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, वहां के मुख्यमंत्री आचार संहिता के कारण इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगे। उन राज्यों की तरफ से मुख्य सचिव कैबिनेट सचिवालय के संपर्क में रहेंगे।

तेल और गैस की सप्लाई पर ‘कवच’ तैयार

युद्ध के समय सबसे बड़ा खतरा ऊर्जा संकट का होता है। पीएम मोदी ने हाल ही में संसद को आश्वस्त किया था कि भारत के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है। सरकार ‘मेड इन इंडिया’ जहाजों और आधुनिक स्टोरेज सिस्टम के जरिए सप्लाई लाइन को सुरक्षित कर रही है। बैठक में राज्यों को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे अपने स्तर पर भी ईंधन के वितरण और उपलब्धता की निगरानी करें ताकि जनता को कोई परेशानी न हो।

जमाखोरों पर गिरेगी गाज, कालाबाजारी पर सख्त पहरा

प्रधानमंत्री ने राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे बाजार पर पैनी नजर रखें। युद्ध की आड़ में जरूरी चीजों की जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे महंगाई पर लगाम कसने के लिए निगरानी तंत्र को सक्रिय करें। पीएम का मानना है कि वैश्विक संकट का बोझ देश के गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए।

घबराने की जरूरत नहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था है चट्टान

पीएम मोदी ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत स्थिति में है। वैश्विक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए एक हाई-लेवल ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ बनाया गया है। यह ग्रुप 24 घंटे वैश्विक बाजार और सप्लाई चेन पर नजर रख रहा है। सरकार अब एलपीजी के बोझ को कम करने के लिए पीएनजी (PNG) के इस्तेमाल को और तेज करने की योजना पर भी काम कर रही है। भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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