Uttar Pradesh News: पूरा देश जब अपने अमर शहीदों की शहादत को नमन कर रहा था। ठीक उसी समय यूपी के शाहजहांपुर में एक बेहद शर्मनाक घटना घटी। यहां नगर निगम परिसर में महान क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं पर बुलडोजर चला दिया गया। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की मूर्तियां मलबे में पड़ी मिलीं। मूर्तियों के सिर और धड़ अलग-अलग होकर सड़क पर बिखरे हुए थे। इस अमानवीय कृत्य के बाद पूरे शहर में भारी आक्रोश फैल गया है।
शाहजहांपुर नगर निगम परिसर में काकोरी कांड के इन नायकों की भव्य प्रतिमाएं लगी थीं। ये मूर्तियां सालों से हमारी आने वाली पीढ़ियों को उनकी शौर्य गाथा याद दिला रही थीं। नगर निगम ने इस पूरे परिसर के सुंदरीकरण का फैसला लिया था। इसका ठेका लखनऊ की एक निजी कंपनी ‘फ्लाई इंफ्राटेक’ को दिया गया था। समझौते के मुताबिक पुरानी मूर्तियों को हटाकर वहां कुछ पीछे हटकर नई प्रतिमाएं लगाई जानी थीं।
काम के दौरान ठेकेदार के कर्मचारियों ने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मूर्तियों को सम्मान के साथ उतारने की बिल्कुल जहमत नहीं उठाई। रविवार की रात उन्होंने मूर्तियों पर सीधा बुलडोजर का भारी पंजा चला दिया। झटके से मूर्तियां सड़क पर गिरीं और बुरी तरह टूट गईं। क्रांतिकारियों के क्षतिग्रस्त हिस्से मलबे में पड़े रहे। वहां से गुजरने वाले लोगों ने जब यह खौफनाक मंजर देखा, तो उनका खून खौल उठा।
जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी, अधिकारियों का रवैया रहा निराशाजनक
टूटी हुई मूर्तियों के वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने लगे। शहर के लोगों ने इसे देश के अमर बलिदानियों का सीधा अपमान माना। सोमवार को स्थानीय पार्षद दिवाकर मिश्रा ने नगर निगम पहुंचकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि इन पूजनीय प्रतिमाओं को कपड़े में लपेटकर पूरे सम्मान के साथ हटाया जाना चाहिए था। कार्यदायी संस्था की इस घोर लापरवाही ने हर सच्चे भारतीय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
इस पूरे मामले में बड़े अधिकारियों का रवैया और भी ज्यादा निराशाजनक रहा। जब लोगों का गुस्सा फूटने लगा, तो नगर आयुक्त डा. बिपिन मिश्रा सवालों से बचते नजर आए। सोमवार शाम को जब मीडिया ने उन्हें इस गंभीर मुद्दे पर फोन किया। उन्होंने कोई भी सीधा जवाब नहीं दिया और खुद को प्रशासनिक बैठक में व्यस्त बताया। इसके बाद उन्होंने आनन-फानन में फोन काट दिया और मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया।
मामला गर्माने के बाद सोमवार शाम को महापौर अर्चना वर्मा मौके पर पहुंचीं। उन्होंने सड़क पर पड़ी क्षतिग्रस्त मूर्तियों को देखकर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने माना कि बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह बुलडोजर चलाना पूरी तरह गलत है। महापौर ने जनता को भरोसा दिलाया है कि ऐसा घृणित काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने ठेकेदार कंपनी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया है।


