Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पहली अप्रैल से सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं बदली है। राज्य के आम नागरिकों की कमाई और खर्च का पूरा गणित भी बदल गया है। नया वित्त वर्ष शुरू होते ही प्रदेश में कई बड़े आर्थिक बदलाव लागू हो गए हैं। इन नए नियमों का सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। कुछ फैसलों से आपकी जेब पर महंगाई की मार पड़ेगी। वहीं, कुछ अन्य फैसलों से किसानों, मजदूरों और महिलाओं को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
एंट्री टैक्स और शराब ने बढ़ाई टेंशन, सस्ती हुई बिजली
सुक्खू सरकार ने नए वित्त वर्ष में एंट्री टैक्स बढ़ा दिया है। अब बाहरी राज्यों से आने वाले वाणिज्यिक वाहनों को ज्यादा टैक्स देना होगा। इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा। रोजमर्रा का सामान काफी महंगा हो सकता है। नई आबकारी नीति के तहत शराब के दामों में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने इससे 2900 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, आम जनता को बिजली के बिलों में मामूली राहत मिली है। सरकार ने बिजली दरों में एक पैसे प्रति यूनिट की कमी की है।
विधायकों का वेतन रुका, महिलाओं और बेटियों को सौगात
प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति का असर माननीयों पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। दूसरी तरफ, महिलाओं को संपत्ति खरीदने पर बड़ी छूट मिली है। 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति महिला के नाम होने पर सिर्फ चार प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी लगेगी। सरकार बीपीएल परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपये की आर्थिक मदद भी देगी। इसके साथ ही शिक्षकों और पुलिस कांस्टेबल के 1,050 खाली पद भरे जाएंगे।
मजदूरों और कर्मचारियों के मानदेय में हुआ बंपर इजाफा
नए वित्त वर्ष में ग्रामीण और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी मिली है। सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स और पंचायत चौकीदारों के मानदेय में अच्छी बढ़ोतरी की है। दिहाड़ीदार मजदूरों की आय भी अब बढ़ गई है। उन्हें अब हर दिन 750 रुपये की दिहाड़ी मिलेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन में भी इजाफा किया गया है। इससे प्रदेश के हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी।
किसानों और पशुपालकों की चमकी किस्मत, राशन में भी राहत
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। एमएसपी और राशन के नए नियम इस प्रकार हैं:
- गाय का दूध अब 51 रुपये की जगह 61 रुपये प्रति लीटर खरीदा जाएगा।
- भैंस का दूध 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
- प्राकृतिक खेती करने वालों का गेहूं अब 80 रुपये प्रति किलो बिकेगा।
- मक्के की सरकारी खरीद दर 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो कर दी गई है।
- सरकार पांगी का जौ 80 रुपये और हल्दी 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदेगी।
- पहली बार अदरक का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 30 रुपये प्रति किलो तय किया गया है।
- एपीएल परिवारों को अब प्रति राशन कार्ड 11 किलो की जगह 12 किलो आटा मिलेगा।


