Himachal News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों के आऊटसोर्स कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। पिछले 10 से 15 सालों से शोषण का शिकार हो रहे ये कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। शुक्रवार को इन कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान में भारी हुंकार भरी। विधानसभा के बाहर एकत्रित होकर उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अल्प वेतन और असुरक्षित भविष्य से परेशान होकर उन्होंने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक कड़ा मांग पत्र भी सौंपा गया है।
अस्तित्व पर छाया संकट, सरकार को दी खुली चेतावनी
आऊटसोर्स कर्मचारी पिछले कई वर्षों से नियमित होने की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन अब उनके सामने अस्तित्व का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी है। यूनियन के संयोजक अश्वनी शर्मा और सह-संयोजक सोहन लाल तुलिया ने साफ शब्दों में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो उनका यह संघर्ष बहुत बड़ा रूप ले लेगा। हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतरकर एक निर्णायक आंदोलन करेंगे।
आऊटसोर्स कर्मचारियों की सरकार से 5 बड़ी मांगें
यूनियन ने अपने मांग पत्र में मुख्य रूप से पांच अहम मुद्दे उठाए हैं। ये मांगें सीधे तौर पर कर्मचारियों की आजीविका और भविष्य से जुड़ी हैं:
- नौकरी की पूरी सुरक्षा मिले। किसी भी कर्मचारी को बिना ठोस कारण के नौकरी से बाहर बिल्कुल न निकाला जाए।
- एक स्पष्ट और पारदर्शी स्थायी नीति बने। आऊटसोर्स कर्मियों को उनके संबंधित विभागों में तुरंत समायोजित किया जाए।
- श्रम कानूनों का पूरी सख्ती से पालन हो। ठेकेदारों के अधीन काम कर रहे कर्मियों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा हर हाल में मिले।
- समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर ही आऊटसोर्स कर्मियों को भी पूरा वेतन मिले।
- मुख्यमंत्री की दुर्घटना सहायता वाली घोषणा तुरंत लागू हो। 15 अक्तूबर को बिजली कर्मियों के लिए हुई इस घोषणा का लाभ सभी आऊटसोर्स कर्मियों को मिले।
सीएम सुक्खू से मिला यूनियन का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल
अपनी इन्हीं मांगों को लेकर यूनियन का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मिला। इस अहम बैठक में सीएम सुक्खू के सामने कर्मचारियों का दर्द रखा गया। अश्वनी शर्मा और सोहन लाल तुलिया ने इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस दौरान विभिन्न सरकारी विभागों के कई बड़े कर्मचारी नेता भी वहां मौजूद रहे। इनमें विद्युत बोर्ड, मिल्क फैडरेशन, स्वास्थ्य विभाग और एचआरटीसी के प्रतिनिधि मुख्य रूप से शामिल थे। सभी ने एक सुर में अपने सुरक्षित भविष्य की गुहार लगाई है।


