रूस-यूक्रेन युद्ध में 10 भारतीयों की मौत: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा खुलासा, क्या एजेंटों के जाल में फंसकर गंवानी पड़ी जान?

New Delhi News: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सरकार ने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए अब तक 10 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि युद्ध क्षेत्र से शवों को वापस लाना एक अत्यंत जटिल कार्य है। सरकार ने इस मानवीय संकट को गंभीरता से लेते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

नौकरी के नाम पर धोखे का शिकार हुए भारतीय

अदालत में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई भारतीयों को आकर्षक नौकरी का लालच देकर रूस ले जाया गया था। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें जबरन अग्रिम मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए भेज दिया गया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने स्पष्ट किया कि याचिका में उल्लिखित 26 व्यक्तियों में से 10 की मृत्यु हो गई है। वहीं, एक व्यक्ति आपराधिक आरोपों में जेल में बंद है और एक अन्य नागरिक ने अपनी मर्जी से रूस में रुकने का फैसला किया है।

एजेंटों के अवैध नेटवर्क पर कसता शिकंजा

केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि कुछ नागरिकों को एजेंटों ने गुमराह किया, जबकि कुछ ने स्वेच्छा से अनुबंध किए थे। इस मामले में विदेश मंत्रालय को शवों की वापसी की प्रक्रिया के दौरान कुछ परिवारों से सहयोग की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सक्रिय अवैध भर्ती एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ये एजेंट झूठे वादे करके भोले-भले युवाओं को युद्ध की आग में झोंकने का काम कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

शीर्ष अदालत ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह संकट में फंसे नागरिकों की सुरक्षा और उनकी स्वदेश वापसी के लिए उठाए गए कदमों की एक व्यापक रिपोर्ट पेश करे। न्यायाधीशों ने जोर देकर कहा कि इस संवेदनशील मामले को बहुत सतर्कता के साथ संभालने की जरूरत है। सरकार ने दोहराया है कि वह विदेशी धरती पर फंसे अपने हर नागरिक की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब सबकी नजरें सरकार की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसमें वापसी के विशिष्ट कदमों का विवरण होगा।

मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति

यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर कूटनीतिक मुद्दा बन गया है। सरकार लगातार रूसी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके। युद्ध की विभीषिका के बीच शवों की शिनाख्त और उनकी गरिमापूर्ण वापसी केंद्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अदालत ने राज्यों को भी अपने प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने को कहा है ताकि भविष्य में कोई और भारतीय ऐसे जानलेवा झांसे का शिकार न हो सके।

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