जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ईरान मुद्दे पर हंगामा, NC विधायकों ने खामेनेई की तस्वीर लहराई

Jammu Kashmir News: मध्य पूर्व में जारी तनाव की गूंज अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा तक पहुंच गई है। शुक्रवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में सदन में जमकर नारेबाजी की। विधायक अपने साथ खामेनेई की तस्वीरें लेकर आए थे और उन्होंने अमेरिका व इजराइल के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन ने सदन की कार्यवाही में बाधा डाली और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी।

विधानसभा में नारेबाजी और प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर विधानसभाकी कार्यवाही के दौरान उस समय हंगामा मच गया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने पोस्टर और तस्वीरें लहराना शुरू कर दिया। विधायकों ने ईरान के दिवंगत नेता खामेनेई के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और अमेरिका-इजराइल की नीतियों की निंदा की। पार्टी का तर्क है कि यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा है। इस दौरान सदन में काफी देर तक नारेबाजी होती रही।

अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का घटनाक्रम

ईरान केसर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या 28 फरवरी 2026 को तेहरान में एक भीषण हमले के दौरान हुई थी। इस हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्यों की भी जान चली गई थी। खामेनेई ने 1989 से लेकर 2026 तक ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया था। उनकी मृत्यु की खबर दुनिया भर में फैलते ही ईरान समर्थकों में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई थी।

अमेरिका और इजराइल की भूमिका

खामेनेई कीहत्या के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया, खासकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की। अमेरिका और इजराइल इस समय ईरान के साथ एक बड़े युद्ध में उलझे हुए हैं। इजराइल लगातार ईरान के ठिकानों पर मिसाइल हमले कर रहा है, जबकि अमेरिका उसे सैन्य और रणनीतिक समर्थन दे रहा है। इस संघर्ष ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।

कश्मीर में माहौल तनावपूर्ण

श्रीनगर और कश्मीर केअन्य हिस्सों में खामेनेई की हत्या के बाद से ही माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। जब उनकी मौत की खबर आई थी, तब श्रीनगर की सड़कों पर कई दिनों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस, जिसके पास वर्तमान में 42 विधायक हैं, के इस कदम को स्थानीय भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। कश्मीर में एक वर्ग ईरान के धार्मिक नेतृत्व के प्रति गहरी आस्था रखता है। यही कारण है कि यह अंतरराष्ट्रीय मुद्दा स्थानीय राजनीति का केंद्र बन गया है। फिलहाल सदन में इस मुद्दे पर हंगामा जारी है।

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