New Delhi News: भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति पूरी तरह विकसित हो चुकी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने शुक्रवार को यह चिंताजनक जानकारी दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इस प्रणाली के और अधिक प्रभावी होने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग ने बताया कि समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही वायुमंडलीय गतिविधियों में भी तेजी से बदलाव देखने को मिला है। अब महासागर और वायुमंडल की संयुक्त प्रणाली अल नीनो के स्पष्ट संकेत दे रही है। मानसून के महीनों में इसकी तीव्रता काफी बढ़ सकती है।
भारतीय कृषि पर मंडराया सूखा संकट
देश में इससे पहले वर्ष 2023, 2002, 2009 और 2015 में भी अल नीनो के खतरनाक हालात देखे गए थे। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का सीधा और नकारात्मक प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ता है। इस मौसम प्रणाली के कारण देश में सामान्य से काफी कम वर्षा होने की आशंका बढ़ जाती है।
अल नीनो एक जटिल वैश्विक जलवायु घटना है। इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य तापमान से बहुत अधिक गर्म हो जाता है। यह ‘अल नीनो दक्षिणी दोलन’ चक्र का एक मुख्य चरण है। इसके विपरीत चरण को ‘ला नीना’ कहते हैं, जो आमतौर पर वैश्विक तापमान को कम करने में मदद करता है।
कम बारिश का अनुमान, किसान परेशान
आईएमडी ने अपने हालिया पूर्वानुमान में कहा है कि इस वर्ष मानसून के दौरान देश में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत ही रहने की संभावना है। भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।
देश में सालाना बारिश का अधिकांश हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही प्राप्त होता है। यह वर्षा देश की कृषि, पेयजल आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन और भूजल पुनर्भरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल मानसून ने केरल में चार जून को दस्तक दी थी, जबकि इसकी सामान्य तिथि एक जून मानी जाती है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो-तीन दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बंगाल के इलाकों में पहुंचने के लिए हालात पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके बाद ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के हिस्सों में भी झमाझम बारिश शुरू होने की उम्मीद है।
Author: Pallavi Sharma


