प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसे में मृतकों की संख्या 4, घायलों के परिवारों में मातम

Prayagraj News: सोमवार दोपहर मलबे में तब्दील हुए आदर्श कोल्ड स्टोरेज की इमारत करीब पांच हजार स्क्वायर फीट में बनी थी। इसका निर्माण वर्ष 1998 में अंसार अहमद उर्फ पहलवान ने कराया था, जो उस वक्त की सपा सरकार में मंत्री थे। मंगलवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने मलबे में दबे दो और मजदूरों को बाहर निकाला। अब घायलों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है और उन्हें खतरे से बाहर बताया गया है।

हादसे में चार मजदूरों की मौत, घायलों की संख्या 19

सोमवार कोहादसे के दिन देर शाम तक 17 घायलों को तेजबहादुर सप्रू और एसआरएन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को मलबे से सुजीत (20) और बृजेश (18) को बाहर निकाला गया। दोनों बिहार के रहने वाले हैं। इलाज के बाद सभी घायलों को खतरे से बाहर बताया गया है। हादसे में चार मजदूरों की जान चली गई। मृतकों के परिजन मंगलवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। बॉडी देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

जगदीश पर थी परिवार की बड़ी जिम्मेदारी

हादसेमें मरने वाले जगदीश कुमार फाफामऊ के रहने वाले थे। परिजनों ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। पति की मौत के बाद पत्नी साधना का रो-रो कर बुरा हाल है। जगदीश तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर थी। वह कई वर्षों से कोल्ड स्टोरेज में मशीन ऑपरेटर का काम करते थे।

सनोज 25 फरवरी को आया था काम की तलाश में

हादसेमें मरने वाले सनोज (36) बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले थे। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। तीन साल पूर्व उनकी शादी हुई थी। परिजनों ने बताया कि वह 25 फरवरी को काम के लिए ठेकेदार के साथ बिहार से प्रयागराज आए थे। उनकी मौत से पूरे परिवार में मातम का माहौल है।

ज्योतिष की मौत से बेटी-बेटे के सामने संकट

मृतक ज्योतिष सदा(22) भी सहरसा जिले के रहने वाले थे। वह दो भाइयों में बड़े थे। उनकी पत्नी रीता देवी हैं। ज्योतिष की मौत के बाद पत्नी के सामने एक बेटी और एक बेटे की परवरिश का संकट खड़ा हो गया है। वह भी 25 फरवरी को ही यहां काम के लिए आए थे। छोटे भाई की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

अविवाहित थे मसीन्दर, कमाने आए थे रोजगार की तलाश

हादसेमें जान गंवाने वाले मसीन्दर कुमार (20) भी बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले थे। वह छह भाइयों में चौथे नंबर पर थे। परिजनों ने बताया कि मसीन्दर अविवाहित थे। आर्थिक रूप से तंग परिवार की मदद के लिए वह दो पैसा कमाने आए थे, लेकिन यह सफर उनका आखिरी हो गया। उनके भाई मनीष भी इसी कोल्ड स्टोरेज में काम करते थे।

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