हिमाचल की सड़कों में अब दबेगा प्लास्टिक का कचरा: गोहर कांड के बाद डीसी का सख्त फरमान, जानिए क्या है नया नियम?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सड़कों के निर्माण में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहाँ सड़कों को बनाने में श्रेडेड प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। प्रशासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी कर ली है। मंडी जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन अब सख्त मोड़ में आ गया है। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने खुले में मल और कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब जिले के 426 गांवों को सुरक्षित मल निस्तारण के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से सीधा जोड़ा गया है।

सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होगा प्लास्टिक कचरा

पर्यावरण को बचाने के लिए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा। डीसी अपूर्व देवगन ने एनजीटी मामलों और प्लास्टिक उन्मूलन को लेकर एक अहम बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित निरीक्षण के सख्त निर्देश दिए हैं। अब प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगेगी। पकड़े गए प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इस खतरनाक प्लास्टिक को सड़क निर्माण और सीमेंट संयंत्रों में उपयोग के लिए भेजा जाएगा।

खुले में मल बहाने वालों की अब खैर नहीं

तरल और ठोस कचरे का सही तरीके से निपटारा करना नगर निकायों की मुख्य जिम्मेदारी होगी। डीसी ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन से जुड़े सभी ठेकेदारों का पंजीकरण अब अनिवार्य है। सेप्टिक टैंक से निकाले गए मल को सिर्फ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में ही डंप किया जाएगा। अगर कोई इसे खुले नालों या खड्डों में बहाता हुआ पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। प्रशासन अब गोहर जैसी किसी भी शर्मनाक घटना को दोबारा दोहराने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

गोहर कांड से सबक, 426 गांव सीवरेज प्लांट से जुड़े

बारिश के मौसम में सेप्टिक टैंक खाली करके मल खड्डों में बहाने की गंभीर शिकायतें मिलती रही हैं। प्रशासन ने अब इस मनमानी पर पूरी तरह से रोक लगाने का कड़ा फैसला किया है। एसडीएम और बीडीओ को जल शक्ति विभाग के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के निर्देश मिले हैं। मंडी जिले में अब 426 गांवों की विस्तृत मैपिंग का काम पूरा हो गया है। इन गांवों को सुरक्षित स्लज निस्तारण के लिए अलग-अलग एसटीपी से जोड़ा गया है। इनमें जोगिंद्रनगर का मझारनू, मंडी का रघुनाथ का पधर और सुंदरनगर का चांदपुर प्लांट मुख्य रूप से शामिल है।

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