Jammu and Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे खराब शासन मॉडल करार देते हुए जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई। अब्दुल्ला ने तर्क दिया कि 90 विधायकों वाले बड़े प्रदेश को पुडुचेरी जैसे छोटे केंद्र शासित क्षेत्र के समान आंकना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोहरी सत्ता व्यवस्था विकास के लिए किसी आपदा से कम नहीं है।
प्रशासनिक ढांचे और शक्तियों के बंटवारे पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने केंद्र के साथ मतभेदों के बीच बिजनेस रूल्स पर हुई प्रगति को सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था और महत्वपूर्ण संस्थानों पर चुनी हुई सरकार का नियंत्रण होना अनिवार्य है। अब्दुल्ला ने जोर दिया कि विश्वविद्यालय, स्किम्स और पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन जैसे संस्थान सीधे निर्वाचित सरकार के अधीन आने चाहिए। उन्होंने पुडुचेरी की तुलना करते हुए पूछा कि क्या बड़े भौगोलिक क्षेत्र की जरूरतों को नजरअंदाज करना शासन के लिए सही है?
दरबार मूव और क्षेत्रीय एकता पर दिया जोर
उमर अब्दुल्ला ने दरबार मूव की बहाली को जम्मू और श्रीनगर के बीच भावनात्मक दूरियां कम करने वाला कदम बताया। उन्होंने उन तत्वों की आलोचना की जो दोनों क्षेत्रों के बीच राजनीतिक दरार पैदा करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, साझा संस्कृति और सरकारी कर्मचारियों के आपसी जुड़ाव से एकता मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी दोनों क्षेत्रों ने हमेशा एकजुटता का परिचय दिया है। दरबार मूव इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण है।
कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा को घेरा
कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि इतने वर्षों बाद भी विस्थापित समुदाय शिविरों में रहने को मजबूर क्यों है? अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की वापसी तभी संभव है जब उनमें सुरक्षा की भावना लौटेगी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जगती टाउनशिप और आरक्षण जैसे प्रयासों को सराहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कश्मीरी पंडितों का उपयोग केवल चुनावी लाभ के लिए कर रही है।
बिजली सब्सिडी और नई योजनाओं का खाका
मुख्यमंत्री ने बिजली सब्सिडी नीति में बदलाव के संकेत देते हुए कहा कि संपन्न लोगों को बाजार दर पर भुगतान करना चाहिए। उन्होंने गरीबी रेखा से ऊपर वाले नागरिकों को सब्सिडी देने का विरोध किया। अपने 20 महीनों के कार्यकाल में उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त शिक्षा और बस यात्रा जैसी सुविधाओं को बड़ी उपलब्धि माना। अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि संसाधनों का सही वितरण ही राज्य की प्रगति का एकमात्र रास्ता है। प्रशासन अब इसी दिशा में काम करेगा।
वंशवाद की राजनीति और मंत्रिमंडल विस्तार पर स्पष्टीकरण
राजनीति में वंशवाद के सवाल पर उमर ने कहा कि परिवार केवल दरवाजा खोलता है, लेकिन टिके रहना प्रदर्शन पर निर्भर है। उन्होंने ममता बनर्जी जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि गैर-वंशवादी नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तमिलनाडु के नतीजों को केवल परिवारवाद के खिलाफ जनादेश मानने से इनकार किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर कैबिनेट में किसी भी प्रकार के फेरबदल की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया।


