Chandigarh News: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने वकीलों को एक बड़ी और व्यावहारिक राहत दी है। कोर्ट प्रशासन ने चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए ड्रेस कोड के नियमों में अस्थायी ढील दी है। जारी किए गए नए नोटिस के अनुसार अब वकीलों के लिए अक्तूबर महीने तक कोर्ट में गाउन पहनना अनिवार्य नहीं होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय वकीलों को गर्मी के दौरान होने वाली शारीरिक असुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब अधिवक्ता बिना गाउन पहने भी अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे और अपनी दलीलें रख सकेंगे। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अन्य आवश्यक औपचारिक पोशाक जैसे सफेद शर्ट और बैंड पहनना पहले की तरह अनिवार्य रहेगा।
इससे पहले हाई कोर्ट ने अदालत की गरिमा और एकरूपता बनाए रखने के लिए साल 2025 से गाउन को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन बढ़ते तापमान और जलवायु परिस्थितियों ने इस नियम में बदलाव के लिए मजबूर किया है। देश के कई अन्य हाई कोर्ट भी अक्सर गर्मियों के महीनों में इस तरह की रियायतें देते रहे हैं।
जलवायु और स्वास्थ्य को देखते हुए बार काउंसिल की अनुमति
बार काउंसिल के नियम भी इस बात की अनुमति देते हैं कि विपरीत मौसम में ड्रेस कोड में लचीलापन अपनाया जा सकता है। वकीलों को घंटों तक अदालत परिसर में अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है। ऐसे में भारी काले गाउन पहनकर काम करना उनके स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
अदालत का यह कदम उन अधिवक्ताओं के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें लंबे समय तक कोर्ट रूम में खड़ा रहना पड़ता है। गाउन से मिली यह छूट केवल अस्थायी है और अक्तूबर के बाद पुराना नियम फिर से लागू हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल मानवीय है बल्कि व्यावहारिक भी है।
इस आदेश के बाद वकीलों में खुशी की लहर है क्योंकि वे काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। औपचारिक पोशाक की गरिमा को बनाए रखते हुए मिली यह ढील अदालती कामकाज को और सुगम बनाएगी। प्रशासन ने वकीलों को सफेद शर्ट और बैंड के साथ औपचारिक पैंट पहनने के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।


