Uttar Pradesh News: कानपुर पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है। पुलिस को एक गुप्त वॉट्सऐप ग्रुप का पता चला है। इस ग्रुप के जरिए इंसानी अंगों की खरीद-फरोख्त का काला कारोबार हो रहा था। जांच में सामने आया है कि इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तार कई देशों से जुड़े हैं। पुलिस अब उन सभी संदिग्धों की तलाश कर रही है। ये लोग इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किडनी डोनर्स और ग्राहकों को जोड़ने के लिए करते थे।
वॉट्सऐप ग्रुप ‘किडनी डोनर’ ने खोले कई राज
पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच टीम इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। जांच के दौरान अधिकारियों को ‘किडनी डोनर’ नाम का एक सक्रिय ग्रुप मिला है। इस ग्रुप में डोनर्स की उम्र, ब्लड ग्रुप और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी साझा की जाती थी। गिरोह के सदस्य ग्राहकों से लाखों रुपये वसूलते थे। डोनर्स को इसका बहुत छोटा हिस्सा ही दिया जाता था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने साइबर सेल की मदद से ग्रुप के सदस्यों का डेटा जुटाना शुरू कर दिया है।
गरीबों की मजबूरी का फायदा उठा रहा था गिरोह
अंग तस्करी करने वाला यह गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाता था। गिरोह के सदस्य अस्पतालों के बाहर और सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की तलाश करते थे। उन्हें पैसों का लालच देकर किडनी दान करने के लिए उकसाया जाता था। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर कई अवैध ट्रांसप्लांट करवाए हैं। अब तक की जांच में कानपुर के अलावा कई अन्य शहरों के अस्पतालों के नाम भी संदिग्ध सूची में शामिल हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला है अवैध अंगों का नेटवर्क
पुलिस को पुख्ता सबूत मिले हैं कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है। गिरोह के कुछ सदस्यों के संपर्क नेपाल और खाड़ी देशों के तस्करों से भी हैं। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे डोनर्स को विदेश ले जाकर भी सर्जरी करवाते थे। इससे वे भारतीय कानून की पकड़ से बच जाते थे। पुलिस ने इस मामले में कुछ डॉक्टरों और निजी अस्पताल के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। जल्द ही इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


