Business News: दुनिया की सबसे लोकप्रिय और बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। बिटकॉइन की कीमत अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार 60,000 डॉलर के स्तर से नीचे गिर गई है। इस बड़ी गिरावट के बाद से पूरे क्रिप्टो बाजार में भारी हलचल और खलबली मच गई है।
बिटकॉइन में जारी गिरावट अब लगातार तेज होती जा रही है। पिछले साल अक्टूबर में यह डिजिटल करेंसी 1.26 लाख डॉलर के अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, वहां से फिसलकर अब बिटकॉइन अपनी कुल कीमत का आधे से ज्यादा हिस्सा गंवा चुका है।
शनिवार सुबह के कारोबार में बिटकॉइन में करीब 7 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ ही इसकी कीमत 59,101 डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गई। हालांकि, कुछ समय बाद यह डिजिटल एसेट 59,743.21 डॉलर के आसपास कारोबार करता देखा गया।
क्यों टूट रहा है बिटकॉइन का बाजार?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बिटकॉइन पर दबाव का सबसे बड़ा कारण वैश्विक तरलता में आया बदलाव है। बड़े और संस्थागत निवेशकों ने अब क्रिप्टो बाजार से अपना हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया है। संस्थागत निवेशकों की ओर से निवेश कम किए जाने से बाजार में नकदी घटी है।
निवेशकों की प्राथमिकताएं बदलने से क्रिप्टो बाजार की पूंजी अब दूसरे सुरक्षित और उभरते क्षेत्रों में जा रही है। लोग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा जैसे मजबूत क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इस वजह से क्रिप्टोकरेंसी बाजार से लगातार पूंजी बाहर निकल रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि सोने और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़ती दिलचस्पी ने भी क्रिप्टो की मांग को घटाया है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को लेकर निवेशकों का नजरिया बदला है, जिससे क्रिप्टो पर दबाव बढ़ा है।
क्या वापस लौटेगा निवेशकों का भरोसा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब निवेशकों की नजरें बिटकॉइन के एक खास स्तर पर टिकी हुई हैं। सभी यह देखना चाहते हैं कि क्या बिटकॉइन 60,000 से 62,000 डॉलर के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर को दोबारा हासिल करके बनाए रख पाता है या नहीं।
अगर बिटकॉइन इस महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को बनाए रखने में कामयाब होता है, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा फिर से लौट सकता है। इसके विपरीत, इस स्तर से नीचे रहने पर बाजार में बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश का प्रवाह और संस्थागत भागीदारी ही आगे की दिशा तय करेगी। इसके साथ ही, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी निकट भविष्य में बिटकॉइन की चाल और इसकी दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक साबित होंगे।
क्रिप्टो बाजार का अगला भविष्य क्या है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी बाजार के अगले विकास चरण को स्पष्ट नियामकीय ढांचे से ही गति मिलेगी। इसके अलावा, स्टेबलकॉइन में नए नवाचार और वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन से बाजार मजबूत होगा। विशेषज्ञों ने निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों को फिलहाल अपने निवेश की अवधि, जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो आवंटन पर अधिक फोकस करना चाहिए। क्रिप्टो मार्केट में उत्साह उस समय और कम हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के लिए अपनी पसंद की घोषणा की।
राष्ट्रपति ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन पद के लिए अपनी पसंद बताया है। इस खबर के बाद से निवेशकों में आशंका बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि वॉर्श के नेतृत्व में फेडरल रिजर्व अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति अपना सकता है।
तरलता की कमी से बढ़ेगा संकट
सख्त मौद्रिक नीति से केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट छोटी होगी और बाजार में उपलब्ध तरलता कम हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरलता अब तक क्रिप्टोकरेंसी जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों को सहारा दे रही थी। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थागत निवेशक लगातार बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
इस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि केवल जनवरी महीने में ही अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ से 3 अरब डॉलर से अधिक की भारी निकासी दर्ज की गई थी। बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह गिरावट जारी रही तो माइनिंग कंपनियों पर संकट बढ़ेगा।
कीमतें गिरने से क्रिप्टो माइनिंग कंपनियों पर नकदी प्रवाह का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में कई माइनर्स को मजबूरन अपनी होल्डिंग बेचनी पड़ सकती है। अगर माइनर्स ने बिटकॉइन बेचे, तो बाजार में गिरावट का दौर और ज्यादा गहरा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा चुनाव जीतने के बाद बिटकॉइन निवेशकों की पहली पसंद बना था। उस समय इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, अब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलती प्राथमिकताओं के कारण इस प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी पर लगातार दबाव बना हुआ है।
Author: Rajesh Kumar


