Himachal News: हिमाचल प्रदेश की हजारों आशा वर्करों के लिए एक निराश करने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि 10 साल से अधिक समय तक सेवाएं दे चुकीं आशा वर्करों को नियमित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह दो टूक जानकारी दी। इसके साथ ही एचआरटीसी के हमीरपुर डिपो में चालकों की भारी कमी का मुद्दा भी सदन में प्रमुखता से उठा।
आशा वर्करों के नियमितीकरण पर सरकार का रुख साफ
नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा था। उन्होंने जानना चाहा कि 10 साल की सेवा पूरी कर चुकीं आशा वर्करों के लिए क्या कोई स्थायी नीति बन रही है। स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी नीति अभी सरकार के विचाराधीन नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 7454 आशा वर्कर 10 साल पूरे कर चुकी हैं। लेकिन उन्हें अभी नियमितीकरण का लंबा इंतजार ही करना होगा।
मिडवाइफ के पदों के लिए आशा वर्कर पात्र नहीं
सरकार ने आशा वर्करों के चयन और उनके काम को लेकर भी नियम स्पष्ट किए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ग्रामीण इलाकों में आठवीं पास महिलाओं को आशा वर्कर चुना जाता है। वहीं शहरी क्षेत्रों में इसके लिए दसवीं पास होना अनिवार्य है। सरकार ने साफ किया कि अपनी तय शैक्षणिक योग्यता के कारण आशा वर्कर मिडवाइफ के कार्यों के लिए पात्र नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े हैं मिडवाइफ के सैकड़ों पद
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश में मिडवाइफ के भारी पद खाली पड़े हैं।
- स्वास्थ्य विभाग में मिडवाइफ के कुल 503 पद स्वीकृत किए गए हैं।
- इनमें से पूरे प्रदेश में सिर्फ 182 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं।
- राज्य में मिडवाइफ के कुल 321 पद पूरी तरह से खाली हैं।
- कुल्लू जिले में सबसे अधिक 90 पद खाली पड़े हैं।
- शिमला में 45, सोलन में 26, हमीरपुर में 21 और चंबा में 19 पद रिक्त हैं।
हमीरपुर डिपो में चालकों का टोटा, बस रूट हुआ ठप
सदन में स्वास्थ्य विभाग के अलावा परिवहन निगम की बदहाली का मुद्दा भी गूंजा। हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने एचआरटीसी बसों के बंद रूटों पर सवाल उठाया। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने माना कि हमीरपुर डिपो में चालकों की भारी कमी है। वहां चालकों के 216 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इस समय केवल 179 चालक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डिपो में 37 पद अभी भी खाली चल रहे हैं।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बहाली पर अटका पेंच
चालकों की कमी का सीधा असर आम लोगों के सफर पर पड़ रहा है। हमीरपुर से शिमला वाया लम्बलू जाने वाली सुबह की बस सेवा को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। यह बस सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर चलती थी। इसे 1 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक बंद रखा गया। उपमुख्यमंत्री ने साफ किया कि इस बस रूट को दोबारा शुरू करना अब यात्रियों की संख्या और चालकों की उपलब्धता पर ही निर्भर करेगा।


