गांवों का बदल जाएगा नक्शा! हर गली को मिलेगा अपना यूनिक नंबर और नाम, केंद्र सरकार ने तैयार किया मेगा प्लान

Delhi News: केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक गांव की आंतरिक सड़कों और गलियों को एक विशिष्ट पहचान देने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने गांवों के भीतर मौजूद सभी सड़कों के लिए यूनिक कोड, डिजिटल पहचान और एक मानकीकृत वर्गीकरण प्रणाली लागू करने का भव्य प्रस्ताव तैयार किया है।

इस प्रस्तावित ‘इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम’ के तहत अब गांवों की सभी आंतरिक सड़कों का नामकरण, कोडिंग और डिजिटल मैपिंग की जाएगी। सरकार इस नए क्रांतिकारी मसौदे को जल्द ही आम जनता के बीच उनके महत्वपूर्ण सुझावों और प्रतिक्रियाओं के लिए आधिकारिक तौर पर जारी करने वाली है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के माध्यम से मुख्य ग्रामीण सड़कों का तो काफी विस्तार हुआ है, लेकिन गांवों के भीतर की छोटी गलियों का अब तक कोई व्यवस्थित दस्तावेजीकरण नहीं हो पाया है। इसके समाधान के लिए अब यह अनोखा डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है।

एंबुलेंस और डाक सेवाओं की राह होगी आसान

गांवों में सड़कों का सही रिकॉर्ड न होने के कारण एंबुलेंस सेवाओं, डाक वितरण, आपातकालीन सरकारी एजेंसियों और गूगल जैसे आधुनिक नेविगेशन प्लेटफार्मों को रास्ता ढूंढने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत गांवों की सड़कों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों (मुख्य सड़क, क्रॉस रोड और संपर्क सड़क) में बांटा जाएगा।

प्रत्येक सड़क को राज्य से लेकर गांव स्तर तक उसकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर एक विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड (अक्षरों और संख्याओं वाला) प्रदान किया जाएगा। इस योजना में डाक विभाग द्वारा विकसित आधुनिक ‘डिजिपिन’ और पंचायती राज मंत्रालय के जियोस्पेशियल प्लानिंग प्लेटफार्म ‘ग्राम मानचित्र’ जैसी डिजिटल तकनीकों को शामिल किया गया है।

इस डिजिटल पहल से ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी, विभिन्न विभागों के कार्यों में दोहराव कम होगा तथा गांवों तक डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। भविष्य में ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्र की सड़कों की पहचान, नामकरण और श्रेणी निर्धारण करने वाली मुख्य जिम्मेदार संस्था के रूप में काम करेंगी।

गलियों में लगेंगे क्यूआर कोड वाले साइनबोर्ड

इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण सड़क को जियोस्पेशियल पहचान संख्या से जोड़ा जाएगा और उसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। गांवों की गलियों में विशेष क्यूआर कोड (QR Code) युक्त साइनबोर्ड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करके कोई भी नागरिक सड़क की स्थिति, रखरखाव के इतिहास और नेविगेशन संबंधी जानकारी देख सकेगा।

ग्रामीण सड़क संपर्क को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में एक और बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार इस साल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और अन्य परियोजनाओं के तहत देश भर में कुल 26,474 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण करने जा रही है, जिससे दूरदराज के क्षेत्र सीधे जुड़ेंगे।

केंद्र सरकार ने इस विशाल बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान सहित कई राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी प्रगति पर चर्चा की है।

Author: Rajesh Kumar

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