Delhi-NCR News: दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने की चाहत रखने वालों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं। अब खरीदार केवल बजट और लोकेशन ही नहीं, बल्कि अपनी लाइफस्टाइल के अनुकूल सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इंडिपेंडेंट फ्लोर बेहतर है या हाई-राइज बिल्डिंग का अपार्टमेंट? एक्सपर्ट्स के अनुसार, हाई-राइज लिविंग आज के होमबायर्स की पहली पसंद बन रही है। यहाँ सुरक्षा, आधुनिक सुविधाएं और सामुदायिक जीवन का बेहतरीन तालमेल मिलता है।
बदली हुई सोच: अब सुविधाओं और सुकून पर है खरीदारों का जोर
रियल एस्टेट मार्केट के मौजूदा रुझानों पर नजर डालें तो खरीदारों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले लोग केवल बिल्डर की साख और कीमत देखते थे। अब लाइफस्टाइल, प्राइवेसी, वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और सेहत से जुड़ी जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है। एसएस ग्रुप के एमडी और सीईओ अशोक सिंह जौनापुरिया बताते हैं कि सुविधाओं के मामले में हाई-राइज अपार्टमेंट काफी आगे हैं। यहाँ एक ही गेटेड सोसाइटी के भीतर जीवन की लगभग सभी बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती हैं।
क्या होता है इंडिपेंडेंट फ्लोर और हाई-राइज लिविंग का फर्क?
इंडिपेंडेंट फ्लोर या बिल्डर फ्लोर का मतलब है एक कम ऊंचाई वाली इमारत में पूरी मंजिल का मालिकाना हक। यहाँ पड़ोसियों की संख्या कम होती है और अपनी जगह पर पूरा नियंत्रण रहता है। इसके विपरीत, हाई-राइज बिल्डिंग में हजारों फ्लैट्स और एक विशाल गेटेड कम्युनिटी होती है। यहाँ सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, गार्ड्स और मेंटेनेंस के लिए एक पूरी टीम तैनात रहती है। इसके अलावा क्लब हाउस, जिम और पूल जैसी लग्जरी सुविधाएं इन इमारतों की पहचान हैं।
प्राइवेसी और सोशल लाइफ के बीच संतुलन का गणित
अगर आपको शांति और भीड़भाड़ से दूर रहना पसंद है, तो इंडिपेंडेंट फ्लोर एक बेहतरीन विकल्प है। यहाँ आपको ज्यादा प्राइवेसी और ओनरशिप का अहसास मिलता है। वहीं, जो लोग एक सक्रिय सोशल लाइफ और आधुनिक सुख-सुविधाएं चाहते हैं, उनके लिए ऊंची इमारतें सबसे बढ़िया हैं। यहाँ बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित पार्क और सामुदायिक मेलजोल के लिए क्लब हाउस जैसी जगहें उपलब्ध होती हैं। यह पूरी तरह आपकी व्यक्तिगत पसंद और रोजमर्रा की जरूरत पर निर्भर करता है।
सुरक्षा और मेंटेनेंस: कौन है ज्यादा चिंता मुक्त विकल्प?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाई-राइज बिल्डिंग में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी पूरी तरह सोसाइटी प्रबंधन की होती है। खरीदार यहाँ चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था के कारण खुद को ज्यादा सुरक्षित और चिंता मुक्त महसूस करते हैं। दूसरी तरफ, इंडिपेंडेंट फ्लोर में मेंटेनेंस का सारा बोझ मालिक को खुद उठाना पड़ता है। सुरक्षा के मामले में इंडिपेंडेंट फ्लोर पूरी तरह से उस विशेष इलाके की स्थिति और लोकेशन पर निर्भर करते हैं, जहाँ वे स्थित हैं।
बजट और निवेश: कहाँ मिलेगा बेहतर रिटर्न और वैल्यू?
बजट के लिहाज से हाई-राइज अपार्टमेंट काफी किफायती साबित होते हैं क्योंकि इनकी प्रति वर्ग फुट लागत कम होती है। वहीं, इंडिपेंडेंट फ्लोर में जमीन का हिस्सा जुड़ा होने के कारण इनकी कीमत हमेशा ज्यादा रहती है। अगर आप रेंटल इनकम के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो हाई-राइज अपार्टमेंट देना ज्यादा आसान है। लेकिन लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाने और प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने के नजरिए से इंडिपेंडेंट फ्लोर को ज्यादा बेहतर माना जाता है।
एक्सपर्ट की राय: आपकी जरूरत ही तय करेगी आपका घर
अशोक सिंह जौनापुरिया के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में घर चुनते समय आपकी जीवनशैली और भविष्य की योजनाएं सबसे अहम हैं। यदि आपके पास बजट अच्छा है और आप पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं, तो इंडिपेंडेंट फ्लोर लें। लेकिन यदि आप आधुनिक सुरक्षा, आसान मेंटेनेंस और अच्छी रेंटल इनकम की तलाश में हैं, तो हाई-राइज अपार्टमेंट ही चुनें। अंततः वही घर आपके लिए सबसे अच्छा है, जो आपकी दैनिक जरूरतों को सरल बनाए और आपके निवेश को सुरक्षित रखे।


