हिमाचल प्रदेश के शिमला में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला: 45 अपात्र लोग उठा रहे सरकारी योजना का लाभ

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में एक बड़ा सरकारी घोटाला उजागर हुआ है। रोहड़ू उपमंडल के छौहारा विकास खंड की तांगणू-जांगलिख पंचायत में पेंशन को लेकर भारी अनियमितताएं मिली हैं। यहां साठ वर्ष की निर्धारित आयु सीमा से पहले ही पैंतालीस लोग वृद्धावस्था पेंशन का अनुचित लाभ ले रहे हैं। इन लाभार्थियों की वास्तविक उम्र चवालीस से चौवन साल के बीच पाई गई है। इस फर्जीवाड़े में छब्बीस पुरुष और उन्नीस महिलाएं शामिल हैं। प्रशासन अब इस मामले की गहन जांच में जुट गया है।

सत्यापन प्रक्रिया और पंचायत रिकॉर्ड पर उठे सवाल

इस फर्जी पेंशन सूची में तांगणू गांव के बीस और जांगलिख के पच्चीस निवासी शामिल हैं। कई अपात्र लोग साल दो हजार अठारह से लगातार सरकारी योजना का पैसा उठा रहे हैं। कुछ लोगों को साल दो हजार इक्कीस के बाद सूची में गलत तरीके से जोड़ा गया। ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में उम्र का बड़ा अंतर होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो गई। पंचायत सचिवों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध मानी जा रही है।

कल्याण विभाग की जांच जारी, अधिकारियों की चुप्पी

जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा शिकायत मिलने के बाद स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच कर चुके हैं। मामले की ऑनलाइन और ऑफलाइन स्तर पर गहन पड़ताल चल रही है। जांच अधिकारी ने अभी कुछ स्पष्ट कहने से इनकार किया है। वहीं बीडीओ छौहारा हिमानी शर्मा ने इस प्रकरण की जानकारी होने से मना किया है। पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार फर्जी पेंशन लेने वाले लाभार्थियों का जन्म उन्नीस सौ बहत्तर से बयासी के बीच हुआ है।

एफआईआर दर्ज होने में देरी से ग्रामीणों में भारी रोष

जांच होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। किसी दोषी अधिकारी या पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। उलटा इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है। दस्तावेजों में स्पष्ट गड़बड़ी सामने आने के बाद भी सुस्ती से लोगों में रोष है। ग्रामीण अब इस भ्रष्टाचार के मामले में जल्द से जल्द कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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