Himachal News: हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीद से जुड़ा एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य में बेनामी सौदों और धारा 118 के उल्लंघन के तीन सौ से अधिक मामले उजागर हुए हैं। राज्य सरकार ने इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कमर कस ली है। उपायुक्त करीब एक सौ पचास मामलों की गहन जांच कर रहे हैं। राज्य के राजस्व मंत्री ने भी नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ बहुत सख्त कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
सोलन जिले से शुरू हुआ बेनामी संपत्ति का खेल
हिमाचल प्रदेश में बेनामी संपत्ति खरीदने का खेल सबसे पहले सोलन जिले से शुरू हुआ था। हाल ही में सोलन का चेस्टर हिल मामला पूरे राज्य में सुर्खियों में छाया है। रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास के नाम पर बाहरी लोग तेजी से जमीनें खरीद रहे हैं। शुरुआत में ऐसे अवैध मामले काफी कम थे। लेकिन पर्यटन विस्तार और मुनाफे की भारी चाह में इन अवैध सौदों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। प्रशासन ने अब राज्य में अपनी निगरानी और ज्यादा बढ़ा दी है।
इन चार जिलों में मिले सबसे अधिक फर्जी मामले
प्रदेश के चार जिलों में नियमों के उल्लंघन के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। सोलन में सबसे ज्यादा अस्सी बेनामी मामले दर्ज हुए हैं। कांगड़ा जिले में सत्तर अवैध सौदे पकड़े गए हैं। शिमला में साठ और ऊना जिले में चालीस फर्जी मामले मिले हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन जिलों में बाहरी लोगों का दखल तेजी से बढ़ा है। राजस्व विभाग और जिला प्रशासन ने इन बढ़ते फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए अब अपनी कानूनी कार्रवाई को बहुत ज्यादा तेज कर दिया है।
पुलिस की विशेष जांच यूनिट करेगी गहन पड़ताल
राज्य सरकार ने फर्जी सौदों को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अवैध जमीन खरीद पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष जांच यूनिट सक्रिय की गई है। यह यूनिट सभी बेनामी मामलों की पूरी रिकॉर्डिंग करेगी। टीम हर मामले की बहुत गहन जांच भी करेगी। पुलिस प्रशासन को मुख्य रूप से रियल एस्टेट परियोजनाओं पर गहरा शक है। जांच टीम संपत्ति खरीदने वालों के नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी। पुलिस अपनी पूरी कार्रवाई को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रही है।
आखिर क्या है धारा 118 और इसके सख्त नियम?
धारा 118 का मुख्य उद्देश्य हिमाचल के स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करना है। इस कड़े नियम के तहत कोई भी गैर-कृषक राज्य में जमीन का नामांतरण नहीं करवा सकता है। अन्य राज्यों के लोग कृषि भूमि को निजी उपयोग के लिए नहीं खरीद सकते। कोई भी जमीन मालिक बाहरी व्यक्ति को सेल डीड, गिफ्ट या लीज के जरिए जमीन नहीं दे सकता है। जमीन का मालिकाना हक केवल खेती करने वाले स्थानीय लोगों के पास ही सुरक्षित रहेगा।
बाहरी लोगों को कैसे मिल सकती है जमीन?
इस सख्त कानून में कुछ विशेष छूट का भी स्पष्ट प्रावधान रखा गया है। मकान बनाने के लिए केवल उन बाहरी व्यक्तियों को अनुमति मिलती है जो तीस वर्षों से हिमाचल में रह रहे हैं। उद्योग या पर्यटन शुरू करने के नियम बिल्कुल अलग हैं। ऐसे गैर हिमाचली लोगों को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अपना आधिकारिक आवेदन करना पड़ता है। संबंधित विभाग से अनिवार्यता प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद ही उन्हें जमीन लेने की अनुमति दी जाती है।
राजस्व मंत्री ने दिए जमीन जब्त करने के आदेश
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस फर्जीवाड़े पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने उपायुक्तों को सख्त कानूनी कार्रवाई करने के सीधे निर्देश दिए हैं। नेगी ने नियमों का उल्लंघन करने वालों की जमीनें तुरंत जब्त करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच में कोई लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी। राज्य सरकार भू-माफियाओं को बख्शने के मूड में नहीं है। प्रशासन पूरे फर्जीवाड़े की तह तक जाने में पूरी तरह से जुटा हुआ है।
आम जनता से भी प्रशासन ने की अहम अपील
इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद प्रशासन ने आम जनता से भी सहयोग मांगा है। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपनी जमीन किसी बाहरी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से न बेचें। बेनामी सौदों की जानकारी तुरंत पुलिस या राजस्व अधिकारियों को दें। सरकार का साफ कहना है कि जमीन बचाने के इस बड़े अभियान में जनता की भागीदारी बहुत जरूरी है। प्रशासन सूचना देने वाले हर व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखेगा।


