National News: शिवसेना (यूबीटी) के कद्दावर नेता और सांसद संजय राउत ने सियासत में भूचाल ला दिया है। राउत की नई किताब ‘अनलाइकली पैराडाइज’ हाल ही में अंग्रेजी भाषा में रिलीज हुई है। इस किताब में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया गया है। राउत का कहना है कि धनखड़ ने पिछले साल (2025) अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भारी दबाव में आकर अपना पद छोड़ा था। संजय राउत ने चुनाव आयोग और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जेल में लिखी गई किताब ‘अनलाइकली पैराडाइज’
संजय राउत ने अपनी इस चर्चित किताब को जेल प्रवास के दौरान लिखा था। मूल रूप से यह किताब साल 2025 में मराठी भाषा में प्रकाशित हुई थी। अब इसका नया अंग्रेजी अनुवाद लॉन्च हुआ है। इस नए संस्करण में चार नए अध्याय जोड़े गए हैं। सोमवार को नई दिल्ली में इस किताब का भव्य विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल और कपिल सिब्बल जैसे बड़े नेता मौजूद रहे। इस किताब में केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज पर सीधा निशाना साधा गया है।
क्या ED के डर से हुआ धनखड़ का इस्तीफा?
किताब में सबसे बड़ा दावा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर है। राउत ने लिखा है कि केंद्र सरकार धनखड़ के कुछ स्वतंत्र फैसलों से नाराज थी। किताब के मुताबिक, ऐसी अफवाहें थीं कि धनखड़ दंपत्ति ने जयपुर का अपना घर बेच दिया था। आरोप है कि उन्होंने संपत्ति की बिक्री से मिली रकम का एक हिस्सा विदेश भेजा था। राउत का दावा है कि ED ने इसी लेन-देन को आधार बनाकर एक फाइल तैयार कर ली थी।
जांच एजेंसियों के भारी दबाव की कहानी
संजय राउत का आरोप है कि एजेंसियों ने पूर्व उपराष्ट्रपति पर दबाव बनाने के लिए इसी फाइल का इस्तेमाल किया। किताब बताती है कि जब सरकार के खिलाफ धनखड़ के स्वतंत्र कदमों की भनक लगी, तो ED ने फाइल उनके सामने रख दी। उन्हें पद छोड़ने के लिए बुरी तरह मजबूर किया गया। आखिरकार, भारी दबाव के चलते उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। राउत ने जांच एजेंसियों को सत्ताधारी दल की ‘शाखा’ तक करार दिया है।
अशोक लवासा और शरद पवार का भी जिक्र
संजय राउत ने अपनी इस किताब में कई अन्य बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का भी स्पष्ट जिक्र किया है। राउत ने लिखा है कि लवासा के परिवार को भी ED के समन का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा राउत ने पीएम मोदी को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने लिखा है कि एक बार शरद पवार के हस्तक्षेप के कारण तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री जेल जाने से बच गए थे। इस किताब ने जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर एक नई बहस छेड़ दी है।


