चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर मंडराया खतरा: 73 सांसदों ने खोला मोर्चा, क्या जाएगी नौकरी?

New Delhi News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। राज्यसभा में उनके खिलाफ 73 विपक्षी सांसदों ने एक बड़ा कदम उठाया है। इन सांसदों ने महासचिव को एक अहम नोटिस सौंपा है। इस नोटिस में ज्ञानेश कुमार को पद से तुरंत हटाने की सख्त मांग है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर नौ बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस नए घटनाक्रम से देश की राजनीति में भूचाल आ गया है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। इसमें ज्ञानेश कुमार पर पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं। रमेश के मुताबिक पंद्रह मार्च के बाद उनके द्वारा लिए गए फैसलों में कई भारी गलतियां सामने आई हैं। विपक्ष इसे संविधान के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश मान रहा है।

संविधान के इन कड़े नियमों का दिया हवाला

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए कई मजबूत संवैधानिक नियमों का सीधा हवाला दिया है। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि यह मांग भारतीय संविधान के विशेष अनुच्छेदों के तहत की गई है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त अधिनियम और न्यायाधीश जांच अधिनियम को भी इस नोटिस का मुख्य आधार बनाया गया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि मौजूदा चुनाव आयुक्त सीधे तौर पर सत्ताधारी नेताओं के इशारों पर ही काम कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने भी इस महाभियोग का किया समर्थन

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी इस बड़े राजनीतिक विवाद में विपक्ष का मजबूती से साथ दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सोमवार को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। उन्होंने ऐलान किया कि विपक्ष चुनाव आयुक्त के खिलाफ अतिरिक्त आरोपों वाला नया महाभियोग प्रस्ताव लाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्नीस राजनीतिक दलों के करीब तीन सौ सांसद एक ऐसा ही प्रस्ताव पेश कर चुके हैं।

आगामी चुनावों से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव

इस अहम नोटिस के बाद अब सरकार और विपक्ष के बीच सीधा और बड़ा टकराव होना लगभग तय माना जा रहा है। विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गहरे सवाल उठाते रहे हैं। देश में आगामी अहम चुनावों से ठीक पहले यह विवाद राजनीति को और ज्यादा गर्म कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नया महाभियोग प्रस्ताव सरकार पर भारी दबाव बनाने की एक बहुत बड़ी विपक्षी रणनीति का अहम हिस्सा है।

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