शिक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए बदलेगा पढ़ाई का तरीका, जानें क्या है NIPUN मिशन का नया प्लान

New Delhi News: भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय की योजना अपनी महत्वाकांक्षी ‘निपुण भारत’ (NIPUN Bharat) मिशन का दायरा कक्षा 3 से बढ़ाकर अब कक्षा 5 तक करने की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में पीछे न रहे। सरकार चाहती है कि जूनियर कक्षाओं के छात्रों में पढ़ने और लिखने की क्षमता और अधिक मजबूत हो।

क्या है निपुण भारत मिशन और इसके नए लक्ष्य?

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में निपुण भारत मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य साल 2026-27 तक कक्षा 3 के सभी बच्चों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) में दक्ष बनाना था। इसके तहत 3 से 9 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए पढ़ने, लिखने और अंकगणित में सार्वभौमिक महारत हासिल करने का लक्ष्य रखा गया। अब कक्षा 5 तक विस्तार होने से उन बच्चों को भी मदद मिलेगी, जो शुरुआती वर्षों में अपेक्षित दक्षता हासिल नहीं कर पाए थे।

कक्षा 5 तक विस्तार के पीछे की खास वजह

शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के परिणामों को देखते हुए यह विस्तार प्रस्तावित है। वर्तमान में साक्षरता और संख्या ज्ञान के आंकड़े लगभग 60 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज किए गए हैं। सरकार उन बच्चों के सीखने के स्तर को और ऊपर उठाना चाहती है जो शायद प्राथमिक कक्षाओं में कमजोर रह गए हों। यह मिशन एक ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करेगा जिससे कक्षा 5 तक का हर छात्र गणित और भाषा में पूरी तरह निपुण बन सके।

PARAKH सर्वेक्षण 2024 के चौंकाने वाले आंकड़े

ताजा PARAKH सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि कक्षा 3 के छात्रों की दक्षता में काफी सुधार हुआ है। भाषा के स्तर में 18 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। वहीं गणित के मामले में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) 2021 के मुकाबले 23 प्रतिशत अधिक छात्र अब दक्ष पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 57 प्रतिशत छात्रों ने भाषा में और 65 प्रतिशत छात्रों ने गणित में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह आंकड़े शिक्षा के क्षेत्र में चल रही सुधार की प्रक्रियाओं की सफलता को दर्शाते हैं।

कोविड-19 के नुकसान की हुई पूरी भरपाई

सर्वेक्षण के परिणाम यह भी संकेत देते हैं कि भारत ने कोरोना महामारी के दौरान हुए ‘लर्निंग लॉस’ यानी सीखने के नुकसान से पूरी तरह उबर लिया है। साल 2021 के मुकाबले साल 2024 के नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। 2021 में भाषा में केवल 39 प्रतिशत और गणित में 42 प्रतिशत छात्र ही दक्ष थे। अब यह ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। मंत्रालय का मानना है कि मिशन का विस्तार प्राथमिक शिक्षा की नींव को और अधिक सशक्त बनाएगा।

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