पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा का आधिकारिक शंखनाद, शिव भक्तों का पहला जत्था नाथूला दर्रे से तिब्बत में करेगा प्रवेश

Gangtok News: शिव भक्तों के लिए एक बेहद पावन और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा दो हजार छब्बीस का आधिकारिक शंखनाद हो चुका है। देश के विभिन्न कोनों से आए तीर्थयात्रियों का पहला जत्था सुरक्षित तरीके से सिक्किम पहुंच चुका है।

यह पूरा दल अब धीरे-धीरे प्रसिद्ध नाथूला दर्रे की ओर आगे बढ़ रहा है। हिंदू धर्म में इस अत्यंत कठिन और अलौकिक यात्रा का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के निवास स्थल माउंट कैलाश और पवित्र मानसरोवर झील के दर्शन के लिए उत्सुक रहते हैं।

बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचा श्रद्धालुओं का पहला विशेष दल

पंद्रह जून दो हजार छब्बीस को कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला बैच विमान से बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद अधिकारियों ने सभी यात्रियों को तुरंत गंगटोक पहुँचाया। यहाँ सभी श्रद्धालु ऊंचाई वाले क्षेत्रों के मौसम के अनुकूल खुद को ढालने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

यह पहला जत्था बीस जून दो हजार छब्बीस को ऐतिहासिक नाथूला पास को पार करके तिब्बत की सीमा में प्रवेश करेगा। विदेश मंत्रालय हर साल इस पूरी यात्रा का मुख्य आयोजन बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच करता है। इस साल नाथूला रूट से कुल पांच सौ तीर्थयात्री दस अलग-अलग बैचों में अपनी यात्रा पूरी करेंगे।

पहले जत्थे में चिकित्सा अधिकारियों समेत चौवालीस लोग शामिल

सिक्किम पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सोमवार की शाम यहाँ पहुंचे पहले विशेष जत्थे में कुल चौवालीस श्रद्धालु शामिल हैं। इस दल की सुरक्षा और सुविधा के लिए दो मुख्य समन्वयक अधिकारी और एक अनुभवी चिकित्सा अधिकारी को भी साथ भेजा गया है।

इस पहले बैच में बत्तीस पुरुष और बारह महिला श्रद्धालु शामिल हैं। गंगटोक के एक स्थानीय आलीशान होटल में सिक्किम पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष लुकेंद्र रसाइली और उप महाप्रबंधक अमित कपिल छेत्री ने सभी यात्रियों का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया और शुभकामनाएं दीं।

मौसम के अनुकूल ढलने के लिए चार दिवसीय विशेष कार्यक्रम

सभी तीर्थयात्री यहाँ चार दिनों के एक विशेष अनुकूलन कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इसके जरिए वे पहाड़ी इलाकों की ऊंचाई और ठंडे मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप खुद को शारीरिक रूप से ढाल सकेंगे। इससे उन्हें आगे की दुर्गम चढ़ाई में कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं होगी।

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी श्रद्धालु बीस जून को ग्यांत्से नगर के लिए रवाना होंगे। ग्यांत्से नगर को नाथू ला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे प्रमुख और सुरक्षित पड़ाव माना जाता है। इस बार यात्रा मार्ग में सुरक्षा और चिकित्सा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।

Author: Pandit Balkrishan Sharma

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