Kolkata News: भारतीय नौसेना को जून के तीसरे हफ्ते में एक बहुत बड़ा रणनीतिक तोहफा मिलने जा रहा है। कोलकाता में आयोजित होने वाले एक विशेष और भव्य समारोह में तीन नए स्वदेशी जहाजों को शामिल किया जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम से देश की समुद्री सुरक्षा और सैन्य ताकत को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
इस विशेष फ्लीट में आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक शामिल हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल नए जहाजों की सामान्य तैनाती नहीं है। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण माना जा रहा है।
कोलकाता के जीआरएसई यार्ड में हुआ है इनका निर्माण
इन अत्याधुनिक जहाजों का निर्माण कोलकाता के प्रसिद्ध यार्ड गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने किया है। इस स्वदेशी प्रोजेक्ट में अस्सी प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी व्यापार के नए और बड़े अवसर मिले हैं।
नौसेना के इतिहास में ऐसे गौरवशाली मौके बहुत कम आए हैं, जब तीन बड़े युद्धपोत एक साथ शामिल हुए हों। इस बार शामिल होने वाले तीनों स्वदेशी जहाज महासागर में अलग-अलग जटिल जिम्मेदारियां निभाएंगे। इनमें से एक मुख्य युद्ध के लिए है, तो दूसरा दुश्मन की खतरनाक पनडुब्बियों का शिकार करेगा।
दुश्मन के रडार को चकमा देगा आईएनएस दूनागिरी
तीनों जहाजों में सबसे ज्यादा चर्चा प्रोजेक्ट सत्रह-ए के तहत बने आईएनएस दूनागिरी की हो रही है। यह आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे दुश्मन के रडार आसानी से बिल्कुल नहीं पकड़ सकते हैं। यह महाबली युद्धपोत समुद्र में तीस नॉट्स से भी अधिक की तेज रफ्तार से दौड़ने में पूरी तरह सक्षम है।
इस घातक युद्धपोत पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और बराक-आठ जैसी खतरनाक एयर डिफेंस प्रणालियां तैनात की गई हैं। यह लंबी दूरी से ही दुश्मन के विमानों और लड़ाकू जहाजों को आसानी से तबाह कर सकता है। इसके रडार और सोनार सेंसर बेहद आधुनिक और अचूक माने जाते हैं।
पनडुब्बियों का काल बनेगा अग्रय और संशोधक जुटाएगा डेटा
दूसरा जहाज आईएनएस अग्रय है, जो एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोग्राम का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य काम समुद्र की गहराई में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें तुरंत नष्ट करना है। कम ड्राफ्ट के कारण यह तटीय और उथले पानी में भी आसानी से काम करता है।
तीसरा जहाज आईएनएस संशोधक है, जो एक बेहद आधुनिक और उन्नत सर्वेक्षण पोत माना जा रहा है। यह महासागर की गहराई को मापने और नौवहन के लिए सटीक डिजिटल मानचित्र तैयार करने का काम करेगा। यह आपदा के समय मानवीय सहायता और राहत अभियानों में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
Author: Sourav Banerjee


